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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह

पंजाबी बोली
१
दसियो मोहन किस दानी।
आवदा जावदा नजर न आवै, अजब तमाशा इस दानी,।
दधि मेरी खायो मटुकिया फोरी, लोभी वह गोरस दानी।
मात यशोदा दधि विलोवै, गोरस ले ले नसदानी।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, लूँ लूँ रस दानी ॥४५२॥†
पदाभिव्यक्ति असगत है।
भोजपुरी बोली
१
मेरो मन बसि गयो गिरधर लाल सो।
मोर मुकुट पीताम्बरो, गल बैजन्ती माल।
गऊवन के सग डोलत हो, जसुमति को लाल।
कालिन्दी के तीर हो, कान्हा गऊबा चराय।
सीतल कदम की छहियाँ हो, मुरली बजाय।
जसुमति के दुवरवाँ हो, ग्वालिन सब जाय।
बरजहूँ अपना दुलरवाँ हो, हमसे अरुझाय।
वृन्दावन क्रीडा करै हो, गोपिन के साथ।
सुर नर मुनि सब मोहै हो, ठाकुर जदुनाथ।
इन्द्र कोप घन बरखे, मूसल जल धार।
बूडत ब्रज को राखेऊ, मोरे प्रान अधार।
मीराँ के प्रभु गिरिधर हो, सुनिये चितलाय।
तुम्हरे दरस की भूखी हो, मोहि कछु न सुहाय। ॥४५३॥
पदाभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबंध का अभाव है।