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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

Page 298 of 365

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Page 298

वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २४५
११
रे री कौन जाति पनिहारी।
इत गोकुल उत मथुरा नगरी, बीच मिले गिरधारी।
सुन्दर वदन नयन मृग मानौँ, विधाता आप सर्वारी।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, तुम जीते हम हारी ॥४२१॥†
पदाभिव्यक्ति मे सगति का अभाव है।
१२
गागर ना भरन देत तेरो कान्ह माई।
हँसि हँसि मुख मोड़ि मोड, गागर छिटकाई।
घूघट पट खोल देत, साँवरो कन्हाई।
जसुमति तै भली बात, लाल कों सिखाई।
नगर डगर झगरो करत, रारि तो मचाई।
हौ तो बीर जमुना तीर, नीर भरन धाई।
गिरधर प्रभु चरण कमल, मीराँ बलि जाई ॥४२२॥†
पद की छठी पक्ति मे प्रयुक्त "बीर" शब्द का अर्थ जुडता नही
है। "गिरधर प्रभु चरण कमल, मीराँ बलि जाई।" जैसी टेक भी
इस पद की विशेषता है।
१३
कमल दल लोचना, तैने कैसे नाथ्यो भुजग।
पेसि पियाला काली नाग नाथ्यो, फण फण निर्त अकरत।
कूद परियो न डर्यो जल माँही, और कारी नहि सक।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, श्री वृन्दावन चन्द ॥४२३॥†
१४
मन अटकी मेरे दिल अटकी हो, मुकट लटक मेरे मन अटकी।
माथे खोर चन्दन की, सेला है पीरे पटकी।