मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २३३
१०
कुछ दोष नहि कुबज्या ने, बीर२ अपना श्याम खोटा ।
आप न आवे पतियाँ न भेजे, कागज का कोई टोटा ।
नौ लख धेनु नन्द घर दूंधे, माखन का नही टोटा ।
आप ही जाय द्वारिका छाये, ले समदर३ की ओटा ।
कुबज्या दासी नन्दराय की, वे नन्द जी के ढोटा ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, कुबज्या बडी हरी छोटा ।
॥३९६॥†
एक निम्नांकित ऐसा ही पद 'चन्द्रसखी' के नाम पर भी प्रचलित है।
कुछ दोष नही कुबज्या ने, वीर आफ्नो स्याम खोटो ।
आप न आवे पतियाँ न भेजे, कागद रो काईं टोटो ।
बिख बेल रे बिख् फल लागे, काई छोटी काईं मोटो ।
जमना के नीरे तीरे धेन चरावे, हाथ चन्दन रो सोटो ।
कुबज्या चेरी कस राय री, वो छै नन्दजी रो ढोटो ।
इस पद मे 'चन्द्रसखी' की छाप नही है तथापि यह 'चन्द्रसखी'के
सग्रह में ही प्राप्त है। पदाभिव्यक्ति देखने से प्रतीत होता है कि गेय
परम्परा के कारण विभिन्न पदाश सग्रहीत होकर एक स्वतन्त्र पद के
रूप मे चल पड़े हैं।
११
हमने सुणी छै हरि अधम उधारन ।
अधम उधारन सब जग तारण ।
गज की अरजि गरजि उठि ध्यायो, संकट पर्यो तब निवारण ।
द्रोपति सुता को चीर बढायो, दुसासन को मान पद मारण ।
प्रल्हाद की प्रतग्यां राखी, हरणाकुस नख इन्द्र विदारण ।
२ भाई, ३ समुद्र ।