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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २३१
प्रसिद्ध है कि मीराँ ने रुक्मणी मगल नामक एक ग्रथ की रचना
भी की थी, परन्तु अभी तक इस ग्रथ की उपलब्धि नही हुई है। श्री सूर्य-
करण जी चतुर्वेदी का मत है कि उपर्युक्त दोनो पद सम्भवत उसी ग्रथ -
के अश हो। सम्पूर्ण ग्रंथ के अप्राप्य होने के कारण मात्र दो चार पदो
के आधार पर इस सबध मे कोई निर्णय देना सभव नही।
५
मत आवै रे नन्द का म्हांकी गली।
म्हाकी गली की बाकी गुवालिन, मत ना लोग हँसावै रे।
सासु बुरी मेरी नणद हठीली, पाडोसण¹ लख जावै२।
कोऊ गलियो मे लुकतो छिपतो म्हांके कामी आवै रे।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, झूठो ही ललचावै रे ।।३९१।।†
६
म्हासूं मुखड़ै क्यूँ नहि बोली।
म्हासूं काईं गुना लियो छै अबोले।
पहली प्रीति करी हरि हम सूं, प्रेम प्रीति को झोलो।
प्रेम प्रीति की गांठना धुलि गई, याने कुण विधि खोलो।
कुब्जा दासी कसराय की, अक भरि भरि तोलो।
मीराँ के प्रभु कबर मिलोगे, हिवडा री गांठवा खोलो ।।३९२।।†
७
मोहन मुसक्याने सखी लागे सोही जाणे।
मै जल जमुना जात वृन्दावन वो पीछे से आयो।
१ पडोसी स्त्रियाँ, २ लख जावे, भाँप लेना।