मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवैष्णव प्रभाव द्योतक पद
पौराणिक गाथाएँ
राजस्थानी में प्राप्त पद
१
क्यूँ कर म्हे दिन काटा (नाथ जी), थे तो म्हांसू अतर राखो
(नाथ जी) राखो क़पटी आंटा।
कुबज्या दासी कस राइं की, फिरती कपड़ा फाटा,
वाकू तो पटरानी कीन्ही पहरे रेसम पाटा।
बाजूबन्द मूंदडी अंगुली नखसिख गहणों साटा,
पहर¹ कुबड़ी न्हावण चाली जमुन के घाटां।
धान न भावै नीद न आवै, चिन्ता लगी निराटा,
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, देख देख हियो फाटां।
॥३८७॥†
२
दूर रहो रे कवर नदना रे, परे² रह रे कवर नदना रे।
कारी कामरी वारा तू रे कान जी ओ,
थे तो रीझ्या³ सालूड़ा⁴ री कोर जी ओ ।
गज मोत्यां⁵ वारी राणी राधिका जी रे,
श्री राधा गोरी ज्याको नाम छै रै ।
१ पहन कर, २ दूर, ३ मोहित हो गये, ४ओढ़नी, ५मोती का राजस्थानी बहुवचन।