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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

Page 269 of 365

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Page 269

वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २१५
१०
काय कूं न लियो तब नू काय कूँ न लियो।
राम जी को नाम तब तू काय कूँ न लियो।
नव मास तू ने उदर मै राख्यो।
झूलणे झुलाओ, तू ने पारणे¹ पोढायो।
बडो रे भयो तब तू कुल लजायो।
गुनका² को बेटा गली माही डोले।
पिता बिन पुत्र ए गुनका को कहायो।
बाई मीराँ के प्रभु तिहारा भजन बिना।
आवो ⁻ रुडो मन खोवे ऐले³ गुभायो ॥३५०॥
पदाभिव्यक्ति मे असंगति है। भाषा परं गुजराती प्रभाव है।
पद की प्रामाणिकता विशेष संदिग्ध है।
११
भजले रे मन गोपाल गुणा।
अधम तरे अधिकार भजन सूं, जोइ आये हरि की सरणा।
अविस्वास तो सखि बताऊ, अजामेल, गणिका, सदना।
जो कृपालु तन मन धन दीन्हो, नैन नासिका मुख रसना।
जाको रचत मास दस लागे, ताहि न सुमिरौ एक दिना।
बालापन सब खेल गमायो, तरुण भयो जब रुप घना।
वृद्ध भयो जब आलस उपज्यो, माया मोह भयो मगना।
गज अरु गीध हूँ तरे भजन सूं, कोऊ तर्यो नही भजन बिना।
धना भगत पीपा मुनि सबरी, मीराँ की हु करो गणना ॥३५१॥†
अन्तिम पक्ति के आधार पर यह सुस्पष्ट हो जाता है कि पद
मीराँ द्वारा रचित नही।
१ पालने, २ गनिका, ३ मारवाडी मे शब्द है 'अहला' जिसका
अर्थ है 'व्यर्थ'।