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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 264

२१० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
पाठान्तर १,
बाहडली जो गहो राम जी, म्हारी बाहडली जो गहो।
भवसागर की तीक्षणधारा, थेई हो न नीमो (निमो)१।
म्हे तो छा ओगण का भरिया, थेई हो न सहो।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर विडद की लाज गहो।
पद की द्वितीय पंक्ति का उत्तरार्द्ध अस्पष्ट है।
११
, सूरत दीनानाथ सो लगी, तू तो समझ सुहागण सुरता नार।
लगनी लहगो पहर सुहागण, बीती जाय बहार।
धन जोवण है पावणा री, मिलै न दूजी बार।
राम नाम को चुडलो पहिरो, प्र ेम को सुरमो सार।
नक बेसर२ हरि नाम की री, उतर चलोनी परले३ पार।
ऐसे बर को क्या करू, जो जन्मे और मर जाय।
बर बरिए एक सावरो री, मेरो चुडलो अमर हो जाय।
मै जान्यो हरि मे ठग्यो री, हरी ठग ले गयो मोय।
लख चौरासी मोरचा री, छिन मै गोप्या छै विगोय।
सुरत चली जहा मै चली रे, कृष्ण नाम झकार।
अविनासी की पोल पर जी, मीराँ करै छै पुकार ॥३३९॥†
पद की प्रथम दो और दो पंक्तियों से सतमत का प्रभाव सुस्पष्ट
हो जाता है। बीच की पंक्तियाँ असम्बद्ध हैं। पद का प्रारम्भ होता
है उपदेशात्मक शैली से, परन्तु अन्त होता है व्यक्तिगत भावनाओ की
अभिव्यक्ति मे। ऐसे पदो की प्रामाणिकता विशेष रूपेण संदिग्ध
ही जान पडती है।
१ निर्वाह कर दिया, २ नथ, ३ उस पार।