मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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६
्रभू, मेरा बेड़ा पार बाधान्यो जी।
मै निगुनी मे गुन नाही प्रभु जी, औगुण चित्त मत लाज्यो जी ।
काड़ खडग राणा जी कोप्या, गरुढ चढ् या हरि आज्यो जी ।
विषरा प्याला राणा जी भेज्या, चरणामृत करि पीज्यो जी ।
काया नगर मे घेर पड़्या छै, ऊपर आयर कीज्यो जी ।
मीराँ दासी जनम जनम की, कठ लगाया कर लीज्यो जी ॥२८५॥†
पदभिव्यक्ति असगत है। राणा जी के द्वारा 'खडग' प्रहार की
कथा पद की प्रामाणिकता मे विशष सदेह उपस्थित करती है। पद
की शैली भी इस सदेह.का समर्थन करती है।
७
मेरी कानां१ सुणज्यो जी करुणा निधान।
रावरो विरद मोय खांड रे, सो लागै परत पराये प्राण।
सगो सनेही मेरो और न कोई, बैरी सकल जहान ।
ग्रह ग्रह्यो गजराज उबार्यो, बूड न दीनो न जान ।
मीराँ दासी अरज करत है, नही जी सहारो आन ॥२८६॥
द्वितीय पक्ति की अभिव्यक्ति स्पष्ट नही है। इस पक्ति मे प्रयुक्त
'परत' शब्द के बदले कही कही पीडित शब्द मिलता है।
८
[ जोगिया के कहज्यो जी आदेस।
जोगिया चतुर सुजाण सजनी, ध्याव२ सकर सेस।
आवूँगी मै नाह रहूगी, रे म्हांरा' पिव बिन परदेस।
१ कानो से सुनो, ध्यान देकर सुनो, २ ध्यान लगाता है।