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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

Page 222 of 365

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Page 222

१६६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
३
पपइया रे पिव की बाणी न बोलं।
सुणि पावेली बिरहणी रे, थांरी राखेली पाख मरोड।
चोच कटाऊ पपइया, ऊपरि कालर लूण।
पिव मेरा मै पिव की रे, तू पिव कहैस¹ कूण।
थारा सबद सुहावणा रे, जो पिव मेल्या² आज।
चोच मढाऊ थांरी सोवनी³ रे, तू मेरे सिरताज।
प्रीतम को पतिया लिखूँ, कऊवा तू ले जाइ।
प्रीतम जू सूं यो कहै रे, थारी बिरहणी धान न खाइ।
मीराँ दासी ब्याकुली रे, पिव पिव करत बिहाई⁴।
बेगि मिलो प्रभु अन्तरजामी, तुम बिन रह्योइ न जाइ॥२६२॥
उपर्युक्त पद की कुछ पंक्तिया "प्रीतम कूँ ...... रह्योइ न
जाय" स्वतन्त्र पद के रूप मे भी प्राप्त है।
४
साजन घर आवो जी मिठबोला।
कब की ठाढ़ी पथ निहारू, था ही आया होसी भला।
आवो निसक सक मत मानो, आयौ ही सुख रहला।
तन मन वार करू न्योछावर, दीजो स्याम मोहेला।
आतुर बहुत बिलम नही करना, आया ही रग रहेला।
तेरे कारण सब रग त्यागा, काजल तिलक तमोला।
तुम देख्या बिन कल न परत है, कर धर रही कपोला।
मीराँ दासी जनम जनम की, दिल की घुन्डी खोला। ॥२६३॥
१ कहने वाला "कहै" शब्द मे 'स' लय बैठाने के लिये जोड दिया गया है।
राजस्थानी गीत-परम्परा मे प्राय ऐसा होता है। २ मिले, ३ सुन्दर, ४ बेहाल।