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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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१४० मीराँ-बृहद्-पद संग्रह
अपने द्वार मै कब की ठाढी, बाह पकरि हरि साधोरी ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, मिलियो बिरह बाजन बाघोरी ।
॥२२४॥†
असंगत अभिव्यक्ति के आधार पर पद की प्रामाणिकता विशेष
संदिग्ध है।
उपर्युक्त दोनो पदो की भाषा प्रधानत. ब्रजभाषा है यद्यपि कुछ
ठेठ राजस्थानी शब्दों का प्रयोग भी है।
३
आण मिल्यो अनुरागी (गिरधर) आण मिल्यो अनुरागी।
सांसो१ सोच अंग नहि, अब तो तिस्ना२ दुबध्या३ त्यागा।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, स्याम बरण४ बड भागी।
जनम जनम के साहिब मेरो, वाही से लौ लागी।
अपण पिया सग हिलमिल खेलूँ, अधर सुधारस पागी।
मीराँ के गिरधर नागर, अब के भई सुभागी ॥२२५॥†
पदाभिव्यक्ति से सतमत और वैष्णव मत दोनो का ही प्रभाव
इंगित होता है।
१ सशय, २ तृष्णा, ३ दुविधा, ४ वर्ण।