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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 182

संघर्षाभिव्यक्ति १२३
मिश्रित भाषा में प्राप्त पद
१
म्हारे सिर पर सालिगराम, राणाजी म्हारे काईं करसी।
मीराँ सूं राणा ने कही थे, सुण मीराँ मोरी बात।
साधो की सगत छोड हो रे, सखिया सब सकुचात।
मीराँ ने सुन यो कही रे, सुण राणाजी बात।
साध तो भाई बाप हमारे, सखियाँ क्यूँ घबरात।
जहर का प्याला भेजिया रे, दीजो मीराँ हाथ।
अमृत कर के पी गई रे, भली करें दीनानाथ।
मीराँ प्याला पी लिया रे, बोली दोऊ कर जोड।
तै तो मारण की करी रे, मेरी राखणहारो और।
आधे जोहड कीच है रे, आधे जोहड हौंज।
आधे मीराँ एकली रे, आधे राणा की फौज।
काम क्रोध को डाल केरे सील लिए हथियार।
जीती मीराँ एकली रे, हारी राणा की धार।
काचागेरी का चौतरा रे, बैठे साध पचास।
जिनमे मीराँ ऐसी दमके रे, लख तारो मे परकास।
टाडा जब वे लादिया रे, बेगी दीन्हा जाण।
कुल की तारण अस्तरी रे, चली हे पुष्कर न्हाण ॥२००॥†
अधिकांश संघर्ष द्योतक पदो की तरह यह पद भी वर्णन और
कथनोपकथन दोनो ही शैलियो मे है। “काचगिरी का चोतरा”
का वर्णन इस पद के महत्व को विशेष रुपसे बढा देता है। “पुष्कर
न्हाण” की अभिव्यक्ति प्राय. अन्य पदो मे भी मिलती है।
२
राणा जी थे जहर दियो म्हैं जाणी।
जैसे कंचन दहत अगिन भें, निकसत बारह बाणी।