मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextसंघर्षाभिव्यक्ति ११६
जो कोई करणी मे चूक पडै तो सतगुरु म्हारा लाजै।
धन रे लोक थांरी करणी कीडी रो कुजर बरगायो।
अण दीठी अण सामलेरे, वद वद बाद उठायौ।
कुल कूँ छाडि कड्बो छाड्यो छाँडी ममता भाई !
और दुनिया को दावो छोड्यो मन मरवै ज्यूँ कहियौ।
यो जस मीराँबाई गावै ज्यूँ कहीयौ ज्यौ सहीयौ ॥१९३॥†
३१
तुलसा की माला हिवड लागी जी “मेवाड राणा” राम ताण गुण गास्या।
लिख पत्तर राणूं मीराँ नै भेज्या सग साध पिस्तास्यो जी।
लिख रे पत्तर मीरा राणा जी नै भेज्या साधूडा सग सुख पास्यां जी।
बिसरा पियाला राणा जी भेज्या पिवतां पिवता म्हानै आवै हासी जी।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर हरि चरणां मे चितल्यास्या जी ॥१९४॥†
पदाभिव्यक्ति का प्रथम अर्द्धांश अन्य पुरुष मे है, जब कि द्वितीय
अर्द्धांश प्रथम पुरुष मे है। अत पद की प्रामाणिकता विशेष संदिग्ध है।
मीराँ और राणा द्वारा एक दूसरे को पत्र भेजे जाने की अभिव्यक्ति
और भी पदो मे मिलती है।
३२
मेड़तिया रा कागद आया, बाई मीराँ ने जा खीज्यो१ जी।
भोहूत२ भात से लिख्या ओलमा, कुल कै दाग३ मति दीज्यो जी।
साधा को सग परो निवारो, वेद साख४ सुण लीज्यो जी।
मीराँ प्रभु को संग छाड्यो, पति आज्ञा मे रीज्यो जी ॥१९५॥†
१ नाराज होना, २ बहुत, ३.कलक, ४ साक्षी।