मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context६६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
डावो' छोड़यो मेड़तो कोई सूधा' द्वारका जाय।
राणा जी सांड्_यो भेजिया जी, पाछा लावो घेर।
घर की नार इस्तरी चाली, चाली छे मुड राठोर।
लाजै पीहर सासरो जी, लाजै भाय र बाप।
लजे दूदा जी रो मेड़तो जी, कोई चोथी गढ चितौड़।
राणा जी विष का प्याला भेजिया जी द्यो मीराँ के हाथ।
कर चरणामृत पी गयाँ जी, आप जानो दीनानाथ।
पेया२ नाग छोड़िया- जी, छाडो मीरा के महल।
हिवड़े३ हार हिडोलिया,४ कोइ तुम जाणो रघुनाथ ॥१६७॥
“दूदा जी रो मेडतो” अभिव्यक्ति विशेष महत्वपूर्ण है। राणा
द्वारा साप भेजे जाने का कथानक यहाँ दूसरे ही रूप मे दिया गया है।
आराध्य के प्रति “मदन गोपाल” सम्बोधन भी इस पद की विशेषता
है। इस पद का भी पहले तीनों पदो से गहरा साम्य है।
पाठान्तर १
में तो सुमर्या छै मदन गोपाल, राणो जी म्हांरो काई करसी।
मीराँ बैठी महल मे जी छाप। तिलक लगाय।
आया राणा जी महल म जी,कोप करियो छै मन माय।
मीराँ महैलाँ से उतऱ्या जी ऊटा कसिया भार।
डावो छोड्यो मेड़तो कोई सूधा द्वारका जाय।
राणा जी साड्_यो भेजियो जी पाछा ल्यावो दौड़।
घर की नार इस्तरी चाली, चाली मुड राठौड।
लाजै पीहर सासरो जी, लाजै माय र बाप।
लाजै दूदा जी रो मेडतो जी लाजै गढ चितोड।
विष का प्याला भेजिया जी, द्यो मीराँ के हाथ।
कर चरणामृत पी गयां जी, आप जाणो दीनानाथ।
१ सीधे, २ पिटारी, ३ हृदय पर, ४ झूला लिया।