मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवियोगाभिव्यक्ति ७१
मेरे मंदिर आये प्रभु निकसि क्यूँ गये, दीन के दयाली कठोर क्यूँ भये ।
दीपक मेरे हाथ लियों बाट जोवती, राम हूँ न आये सारी रैण रोवती ।
पिया के दरस बिन फिरु डोलती, मीराँ तो तुम्हारी दासी राम बोलती ।
॥१९१॥†
पदाभिव्यक्ति सर्वथा असंगत है। कही कही द्वितीय पंक्ति मे
‘कदी’ शब्द के बदले ‘देख ही’ और अन्तिम पंक्ति मे “डोलती’ शब्द
के बदले ‘झूरती’ का प्रयोग भी मिलता है।
३१
होली पिया बिन मोहि न भावै, घर आँगण न सुहावै ।
दीपक जोय¹ कहा करु सजनी, पिय परदेस रहावै ।
सूनी सेज जहर ज्यूँ लागे, सुसक सुसक जिय जावै ।
नीद नही आवै ।
कब की ठाढी मे मग जोऊँ, निस दिन बिरह सतावै ।
कहा कहू कुछ कहत न आवै, हिवडा अति अकुलावै ।
पिया कब दरस दिखावै ।
ऐसा है कोई परम सनेही, तुरन्त सन्देशो ल्यावै ।
वा बिरियाँ² कद³ होसी, मोकूँ हस करि निकट बुलावै ।
मीराँ मिल होली गावै । .॥१९२॥
प्रथम पति मे प्रयुक्त ‘पिया’ शब्द के बदले “हरी’ शब्द का भी
प्रयोग मिलता है।
३२
किण संग खेलूँ होली, पिया तजि गए हे अकेली ।
माणिक मोती हम सब छोडे, गले मे पहनी सेली॒ ।
१ जलाकर, २ समय, ३ कब,