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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

DevanagariRajasthanipublished365 pages

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वियोगाभिव्यक्ति ६३
जैसे जल के सोखे हुए मीन क्या जीवै बिचारै।
कृपा कीजो दरसण दीजो, मीर माधो नन्द दुलारे।
(पद ४६९, पृष्ठ १२०)
मीराँ के पद सभी गेय परम्परा से प्राप्त हैं। अतः परिस्थिति
दखते उपर्युक्त पद को 'मीर माधो' के पद का ही गेय रूपांतर मानना
अयुक्तियुक्त न होगा।
९
घर आवो जी साजन मिठबोला१ ।
तेरे खातर सब कुछ छोडा, काजर तेल तमोला।
जो नहि आवै रैण बिहावै, छिन मासा छिन तोला।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, कर धर रही कपोला ॥९०॥
इस पद से गहरा साम्य रखता हुआ एक पद स० ३३ राजस्थानी
मे भी पाया जाता है।
१०
तुम आज्यो जी रामा, आवत आस्या सामा।
तुम मिलिया मै बहुत सुख पाऊ, सरै२ मनोरथ कामा।
तुम बिच हम बिच अतर नाही, जैसे सूरज घामा।
मीराँ मन के और न मानै, चाहे सुन्दर स्यामा ॥ ९१ ॥
११
उड जा रे कागा बनका, मेरा स्याम गया बोहो दिन कारी।
तेरे उडास्यूं राम मिलेगा, धोखा भागै मन का रे।
इत गोकुल उत मथुरा नगरी, हरि है गाढ़े दिल्का रे।
१ मधुर भाषी २ पूर्ण हो । *