मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context५० मीरों-बृहद्-पद-संग्रह
३९
मदरो १ सो बोल मोरा, मोरा स्याम बिन जिव दोरा।
दादुर मोर पपइया बोले, कोयल कर रही शोरा।
झरमुर झरमर मेहा बरसे, गाजत हे घन घोरा।
मीराँ के प्रभु राधा बोले, स्याम मिल्या जिव सोरा २ ॥६७॥
४०
ऊधो, भली निभाई रं, त्यागे गोपी गोकुल म्हाने क्यूँ तरसाहि रे।
चन्दन घिस लाई, वा से प्रीत लगाई, वा नै लाज न आई।
खो देस्यो जी, उधो जी, आखिर चेरी की जाई रे।
बोहोत दिन बीत्या, म्हारी सुध न लई, नैणा से नीद गई।
चांदणी सी रात, म्हारे बैरण भई रे।
रास तो कियो म्हासे, प्रीतडली जोडी अब तुम काहे कूँ तोड़ी।
तीख ३ की मारी, म्हासै हुई छै नेडी ४ रे।
मीराँ जी तो बिना कल ना पडै, पल बिन नाही सरै।
छतियाँ तप़ै नैणा नीर झरै रे। ॥६८॥†
पद की पाचवी और सातवी पंक्तियो का शेष पद से पूर्वापर संबंध
नही बैठता। पद की आठवी पंक्ति निरर्थक है।
४१
अहो कांई जाणे गुवालियो, बेदरदी पीर तो पराई।
थे जनमत ही कुल त्यागन कीनों, बन बन धेनु चराई।
चोर चोर दधि माखन खायो, अबला नार त ताई।
१ मधुर, २ आराम युक्त, ३ इर्षा, ४ निकट,