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मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण

Matsya Purana

by महर्षि वेदव्यास

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DevanagariHindipublished1,098 pages

Page 1050 of 1098

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Page 1050
१०४०* मत्स्यपुराण *

दो सौ तिहत्तरवाँ अध्याय

आन्ध्रवंशीय, शकवंशीय एवं यवनादि राजाओंका संक्षिप्त ऐतिहासिक विवरण

सूत उवाचसूतजी कहते हैं—
काणवायनांस्ततो भृत्यान् सुशर्माणं प्रसह्य तम्।<br>शुङ्गानां चैव यच्छेषं क्षपित्वा तु बलीयसः॥ १ऋषियो! (गत अध्यायमें कथित) काणवायनवंशमें उत्पन्न होनेवाले क्षत्रियों तथा उनके स्वामी सुशर्मा नामक राजाको, जो शुङ्गभृत्योंका अन्तिम राजा होगा, बलपूर्वक पराजित कर उन्हींका सजातीय शिशुक नामक आन्ध्र राजा इस वसुन्धराको प्राप्त करेगा।*
शिशुकोऽन्ध्रः सजातीयः प्राप्स्यतीमां वसुंधराम्।<br>त्रयोविंशत्समा राजा शिशुकस्तु भविष्यति॥ २वह शिशुक तेईस वर्षोंतक पृथ्वीका शासन करेगा।
कृष्णो भ्राता यवीयस्तु ह्यष्टादश भविष्यति।<br>श्रीशातकर्णिर्भविता तस्य पुत्रस्तु वै दश॥ ३उसके बाद उसका छोटा भाई कृष्ण अठारह वर्षतक शासन करेगा। उसका पुत्र श्रीशातकर्णि दस वर्षतक राज्य करेगा।
पूर्णोत्सङ्गस्ततो राजा वर्षाण्यष्टादशैव तु।<br>स्कन्धस्तम्भिस्तथा राजा वर्षाण्यष्टादशैव तु॥ ४उसका पुत्र पूर्णोत्सङ्ग नामक राजा होगा, जो अठारह वर्षोंतक राज्य करेगा। उसके बाद स्कन्धस्तम्भि नामक राजा अठारह वर्षतक राज्य करेगा।
पञ्चाशतं समाः षट् च शान्तकर्णिर्भविष्यति।<br>दश चाष्टौ च वर्षाणि तस्य लम्बोदरः सुतः॥ ५फिर शान्तकर्णि नामक राजा छप्पन वर्षतक राज्य करेगा। उसका पुत्र लम्बोदर अठारह वर्षतक राज्य करेगा।
आपीतको दश द्वे च तस्य पुत्रो भविष्यति।<br>दश चाष्टौ च वर्षाणि मेघस्वातिर्भविष्यति॥ ६उसका पुत्र आपीतक बारह वर्षतक राज्य करेगा। तदनन्तर मेघस्वाति नामक राजा होगा, जो अठारह वर्षतक राज्य करेगा।
स्वातिश्च भविता राजा समास्त्वष्टादशैव तु।<br>स्कन्दस्वातिस्तथा राजा सप्तैव तु भविष्यति॥ ७इसके बाद स्वाति नामक राजा होगा, वह भी अठारह वर्षतक राज्य करेगा। फिर स्कन्धस्वाति नामक राजा सात वर्षतक राज्य करेगा।
मृगेन्द्रः स्वातिकर्णस्तु भविष्यति समास्त्रयः।<br>कुन्तलः स्वातिकर्णस्तु भविताष्टौ समा नृपः।<br>एकसंवत्सरं राजा स्वातिवर्णो भविष्यति॥ ८इसके बाद मृगेन्द्र स्वातिकर्ण नामक राजा तीन वर्षोंतक पृथ्वीपर शासन करेगा। तदनन्तर कुन्तल स्वातिकर्ण आठ वर्षोंतक राज्य करेगा। उसके बाद स्वातिवर्ण नामक राजा मात्र एक वर्ष राज्य करेगा।
भविता रिक्तवर्णस्तु वर्षाणि पञ्चविंशतिः।<br>ततः संवत्सरान् पञ्च हालो राजा भविष्यति॥ ९तदनन्तर रिक्तवर्ण पच्चीस वर्षतक राजा होगा। उसके बाद पाँच वर्षतक हाल राजा होगा।
पञ्च मन्तुलको राजा भविष्यति समा नृपः।<br>पुरीन्द्रसेनो भविता तस्मात् सौम्यो भविष्यति॥ १०इसके बाद मन्तुलक नामक राजा होगा, जो पाँच वर्षतक राज्य करेगा। उसके बाद पुरीन्द्रसेन राजा होगा।
सुन्दरः शान्तिकर्णस्तु अब्दमेकं भविष्यति।<br>चकोरः स्वातिकर्णस्तु षण्मासान् वै भविष्यति॥ ११फिर इसके बाद सौम्य एवं सुन्दर स्वभाववाला शान्तिकर्ण नामक राजा होगा, जो मात्र एक वर्षतक राज्य करेगा। फिर चकोरस्वातिकर्ण नामक राजा होगा, जो मात्र छः मास ही शासन करेगा।

* मत्स्यमहापुराणका यह तथा गत २७२ वाँ अध्याय सभी भारतीय इतिहासोंके लिये अत्यन्त प्रामाणिक माने गये हैं। क्रेम्ब्रिज इतिहासके प्रथम भाग, 'स्मिथ' के भारतके प्राचीन इतिहासमें तथा भारतीय विद्याभवनके बृहद् इतिहासके दूसरे भागमें इसका विस्तृत विवरण इसी पुराणके आधारपर विवेचित है। पार्जीटर आदिने अनेक अभिलेखोंसे भी इसकी परीक्षा कर शुद्धता और परम प्रामाणिकता स्वीकार कर ली है।