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मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण

Matsya Purana

by महर्षि वेदव्यास

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DevanagariHindipublished1,098 pages

Page 1047 of 1098

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Page 1047
* अध्याय २७२ *१०३७

| त्रयस्त्रिंशत्तु वर्षाणि महीनेत्रः प्रकाश्यते।<br>द्वात्रिंशत्तु समा राजा चञ्चलस्तु भविष्यति॥ २९<br>रिपुञ्जयस्तु वर्षाणि पञ्चाशत् प्राप्स्यते महीम्।<br>द्वात्रिंशति नृपा ह्येते भवितारो बृहद्रथाः।<br>पूर्णं वर्षसहस्रं तु तेषां राज्यं भविष्यति॥ ३० | होगा। उसके बाद तैंतीस वर्षोंतक महीनेत्रका राज्य होगा। तदुपरांत बत्तीस वर्षतक चञ्चल राजा होगा। उसके बाद पचास वर्षोंतक पृथ्वी रिपुञ्जयके हाथमें रहेगी। इस प्रकार ये बत्तीस राजा बृहद्रथके वंशमें उत्पन्न होंगे। उनका राज्यकाल पूरा एक सहस्र वर्षका होगा॥ १८-३०॥ |

इति श्रीमात्स्ये महापुराणे राजवंशानुकीर्तने एकसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः॥ २७१॥
इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें राजवंशका कीर्तन नामक दो सौ एकहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ॥ २७१॥


दो सौ बहत्तरवाँ अध्याय

कलियुगके प्रद्योतवंशी आदि राजाओंका वर्णन

| सूत उवाच<br>बृहद्रथेष्वतीतेषु वीतिहोत्रेष्ववन्तिषु।<br>पुलकः स्वामिनं हत्वा स्वपुत्रमभिषेक्ष्यति॥ १<br>मिषतां क्षत्रियाणां च बालकः पुलकोद्भवः।<br>स वै प्रणतसामन्तो भविष्यो नयवर्जितः॥ २<br>त्रयोविंशत् समा राजा भविता स नरोत्तमः।<br>अष्टाविंशतिवर्षाणि पालको भविता ततः॥ ३<br>विशाखयूपो भविता नृपः पञ्चाशतिं तथा समाः।<br>एकविंशत् समा राजा सूर्यकस्तु भविष्यति॥ ४<br>भविष्यति समा त्रिंशत् तत्सुतो नन्दिवर्धनः।<br>द्विपञ्चाशत्ततो भुक्त्वा प्रणष्टाः पञ्चते नृपाः।<br>हत्वा तेषां यशः कृत्स्नं शिशुनागो भविष्यति॥ ५<br>वाराणस्यां सुतं स्थाप्य श्रयिष्यति गिरिव्रजम्।<br>शिशुनागश्च वर्षाणि चत्वारिंशद् भविष्यति॥ ६<br>काकवर्णः सुतस्तस्य षट्त्रिंशत् प्राप्स्यते महीम्।<br>षड्विंशच्चैव वर्षाणि क्षेमधर्मा भविष्यति॥ ७<br>चतुर्विंशत्समाः सोऽपि क्षेमजित्प्राप्स्यते महीम्।<br>अष्टाविंशतिवर्षाणि विम्बसारो भविष्यति॥ ८ | **सूतजी कहते हैं—**ऋषियो! (मगधमें) बृहद्रथवंशीय एवं अवन्तिदेशमें वीतिहोत्रवंशीय राजाओंके समाप्त हो जानेपर पुलक अपने स्वामी (रिपुञ्जय)-को मारकर उसके स्थानपर अपने पुत्रको अभिषिक्त करेगा। पुलकसे उत्पन्न हुआ वह बालक क्षत्रियोंके देखते-देखते केवल शक्तिके बलपर सामन्तोंद्वारा वन्दनीय हो जायगा, किंतु उसका शासन नीति-धर्म-पूर्ण न होगा। वह नरोत्तम तेईस वर्षोंतक राज्य करेगा। इसके बाद अट्ठाईस वर्षोंतक पालक राजा होगा। तत्पश्चात् विशाखयूप नामक राजा होगा, जो पचास वर्षोंतक राज्य करेगा। फिर सूर्यक इक्कीस वर्षोंतक राज्य करेगा। उसके बाद उसका पुत्र नन्दिवर्धन राजा होगा, जो तीस वर्षोंतक राज्य करेगा। इस प्रकार ये पाँच राजा बावन वर्षोंतक पृथ्वीका उपभोग करके नष्ट हो जायँगे। तदनन्तर इन राजाओंके सम्पूर्ण यशका अपहरण करके शिशुनाग नामक राजा होगा, जो वाराणसी नगरीमें अपने पुत्रको स्थापित कर स्वयं गिरिव्रज (राजगृह या पाटलिपुत्र)-का आश्रय लेगा। यह शिशुनाग चालीस वर्षोंतक राजा होगा। उसका पुत्र काकवर्ण होगा, जो छब्बीस वर्षोंतक पृथ्वीका राज्य करेगा। उसके बाद छत्तीस वर्षोंतक क्षेमधर्मा नामक राजा होगा। तदनन्तर चौबीस वर्षोंतक क्षेमजित् नामक राजा राज्य करेगा। तत्पश्चात् अट्ठाईस वर्षोंतक |