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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

by महर्षि मनु

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished649 pages

Page 265 of 649

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Page 265

नोत्सङ्गे भक्षयेद्भक्ष्यान्न जातु स्यात्कूतूहली ॥ ६३ ॥
न नृत्येदथवा गायेन्न वादित्राणि वादयेत् ।
नास्फोटयेन्न च श्वेडेन्न च रक्तो विरावयेत् ॥ ६४ ॥
जिस वस्तु से चिकनापन निकला हो उसको न खाना और
बहुत घबड़ाहट से भोजन न करना। बहुत सुबह और साम को
भी भोजन न करना, और जिसने सुबह भोजन कर लिया हो
वह साम को भोजन न करे। मुख, हाथ, पाँव से व्यर्थ चेष्टा न
करना। अञ्जुली से पानी पीना, गोद में अन्न रखकर खाना और
बिना मतलब दूसरे की बातों को जानने की आदत रखना, नाचना,
गाना, बजाना, किसी चीज़ को ठोंकना, ज्यादा हँसना, खुशी से
ज्यादा चिल्लाना-यह सब काम न करना चाहिए ॥ ६२-६४ ॥
न पादौ धावयेत्कांस्ये कदाचिदपि भाजने ।
न भिन्नभाण्डे भुञ्जीत न भावप्रतिदूषिते ॥ ६५ ॥
उपानहौ च वासश्च धृतमन्यैर्न धारयेत् ।
उपवीतमलङ्कारं स्रजं करकमेव च ॥ ६६ ॥
नाविनीतैर्व्रजेद्धुर्यैर्न च क्षुद्व्याधिपीडितैः ।
न भिन्नशृङ्गाक्षिकुरैर्न बालधिविरूपितैः ॥ ६७ ॥
विनीतैस्तु व्रजेन्नित्यमाशुगैर्लक्षणान्वितैः ।
वर्णरूपोपसंपन्नैः प्रतोदेनातुदन् भृशम् ॥ ६८ ॥
कांस के बर्तन में पैर धोना, फूटे पात्र व जिसमें संदेह हो, उस
में भोजन न करना । दूसरे के पहनेहुए जूता, कपड़ा, जनेऊ,
गहना, फूल की माला और कमण्डलु को धारण न करना । जो
बैल सीधा हो, भूखा न हो, सींग, आँख, खुर ठीक हो, पूंछ वगै-
रह कटजाने से खराब न दीखता हो। ऐसे बैल की सवारी में
बैठना चाहिए । जो सधगये हों, तेज हों, सुन्दर हों, उनकी
सवारी में बैठना और ज्यादा हाँकना व मारना न चाहिए ॥६५-६८॥