Skip to content
SarvaKosh
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

Page 9 of 120

Read in context
Page 9

भी अधीन है, वो सुखी नहीं है। पर मजबूरी में बंदर ने बीड़ी भी पी। आखिर में मदारी ने जो-जो चाहा, उससे करवाकर छोड़ा, क्योंकि वो अधीन था। पक्का करवाया। साहिब भी कह रहे हैं—

जस नट मरकट को दुख देई। नाना नाच नचावन लेई ॥

मन को क्यों जरूरत पड़ी? साँड को बाँधने की जरूरत पड़ी कि हल चलाना है। कुछ बैलगाड़ी में भी बैल को जोतते हैं; कुछ कोल्हू में लगाते हैं। बहुत काम करवाते हैं बैल से। यू.पी. में बैलों से बड़े काम करवाए जाते हैं।

आत्म-देव को भी निरंजन ने जकड़ा है। आदमी खुद हल नहीं चला सकता है, इसलिए बैल को जकड़ा है। इस तरह निरंजन और माया काम नहीं कर सकते हैं। आत्मा को लगा रखा है। आत्मा से शरीर का सारा काम करवा रहे हैं। आत्मा का शरीर से नाता ही क्या है! यह मन-माया का खेल है। आत्मा कभी चाहती है कि निकलूँ, पर नहीं निकल पाती है। क़तई बैल को कोई नहीं छोड़ना चाहता है। हालाँकि बैल को जन्म नहीं दिया; बनाया नहीं। अच्छा, बैल आदमी के काबू में आया कैसे? पहले-पहले ऐसे आया होगा कि 84 लाख में यह भी था। इसे इंसान ने देखा होगा और पकड़ लिया होगा। गाय को भी पकड़ा होगा। जब कुछ बच्चे हुए होंगे तो दूसरे ने कहा होगा कि मुझे भी एक दो। फिर उसने किसी चीज़ के बदले वो दिया होगा।

हमारे गाँव में हाथियों ने दो आदमियों को मार दिया। वो दिन में नहीं आते हैं। वो रात के समय घरों में घुसकर खाने की चीज़ें लेते हैं और यदि आदमी मिल जाए तो मार देते हैं। तो इंसान उसे अपने मतलब के लिए पकड़ लेता है। अभी भी जंगलों में बड़े हाथी हैं। इंसान कैसे पकड़ता है? बड़ी तरकीब से पकड़ता है। जंगल में एक पेड़ के कुछ दूर सामने एक खड्डा खोदते हैं और उसे छोटी-छोटी लकड़ियों और घास-फूस के साथ ढक देते हैं। पेड़ के साथ एक हथिनी को बाँध देते हैं। हाथी हथिनी को देखकर आता है। उसे कुछ होश नहीं रहता है। वो सीधा उस