Skip to content
SarvaKosh
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

Page 68 of 120

Read in context
Page 68

इन बातों पर विचार किये भक्ति करता है। फिर वो साहिब गोपियों-ग्वालों को संग खेलने गोकुल में नहीं आया और न ही भक्षक वाले काम करके कंस को मारा। वो साहिब तो सब पर मेहरबान है, न किसी से जीतता है, न हारता है। वो साहिब बुद्ध बनकर भी नहीं आए, उन्होंने राक्षसों को भी नहीं मारा। सच्चे साहिब के ज्ञान बिना मनुष्य भ्रमित हो गया। माया ने सबको भ्रमित कर दिया। फिर वो कलकी अवतार लेकर भी नहीं आया, कलिंग के लोगों को नहीं मारा। यह सब छल तो माया ने ही किया, योगियों, यतियों, सत्यवादियों, सबको टरका दिया। जैसे बच्चा हवाई जहाज़ लेना चाहता है, जिद् करता है तो उसे झूठे, नकली खिलौने वाले जहाज़ से टरका दिया जाता है, ऐसे ही माया ने बड़े-बड़ों को झूठ से टरका दिया। दस अवतार जो हुए, वो सब निरंजन की माया थी (निरंजन को ही ईश्वर कहा जाता है, परमात्मा कहा जाता है), जिसे सारा संसार साहिब समझकर, परम सत्ता समझकर पूजता है। साहिब कह रहे हैं, हे लोगो! मेरी बात सुनो और उस पर विचार करो, जो इस संसार में माया का शरीर लेकर जन्म लेता है और मर जाता है, वो साहिब नहीं है, कोई और (निरंजन) है।

काल-पुरुष ने साहिब से विनती करके कलयुग में उनके नाम पर 12 पंथों को तो चलाने का शब्द लिया, क्योंकि कलयुग में ही साहिब बहुत जीवों को नाम देकर अमर-लोक पहुँचाते हैं। बाकी तीन युग साहिब थोड़े-थोड़े जीवों को ही ले जाते हैं। इन तीन युगों में निरंजन स्वयं संसार में अवतार धारण करके आता है और हीरो तथा रक्षक बनकर जीवों को भ्रमित करता है। जीव वहीं मग्न रहते हैं।

धर्मदास को अवतारों की कथा कहते हुए साहिब कह रहे हैं—
जबहिं राम लंका से आये। अयोध्या कोट उठावन लाये ॥
लक्ष्मण भाइ संग तब लीन्हा। सुदिन जान कै तब निव दीन्हा ॥
उठत कोट सो भय अस शोरा। है कछु द्रव्य नीच अस बोला ॥
सुन अस वचन राम रघुराई। खनहु खनहु अस आज्ञा पाई ॥