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मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

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  1. मैं कहता हूँ आँखिन देखी
  2. गुरु संजीवन नाम बतावे
  3. नाम बिना नर भटक मरे
  4. रोगों की पहचान
  5. यह संसार काल को देशा
  6. न्यारी भक्ति
  7. साहिब तेरी साहिबी सब
    घट रही समय
  8. जाप मरे अजपा मरे अनहद
    भी मर जाए
  9. आयुर्वेद का कमाल रोगों के
    निदान में
  10. सुरति समानी नाम में
  11. सबकी गठरी लाल है, कोई
    नहीं कंगाल
  12. निन्दक जीवे युगन युग
    काम हमारा होय।
  13. निराले सदगुरु
  14. कुँजड़ों की हाट में हीरे का
    क्या मोल
  15. जीवड़ा तू तो अमर लोक का
    पड़ा काल बस आई हो
  16. मुझे है काम 'सदगुरु से
    जगत रूठे तो रूठन दे'
  17. जेहि खोजत कल्पो भये
    घटहि माहिं सो मूर
  18. आत्म ज्ञान बिना नर भटके
  19. बिन सतगुरु बाँचे नहीं
    कोटिन करे उपाय
  20. अँधी सुरति नाम बिन जानो
  21. सत्यनाम निज औषधि
    सदगुरु दर्ई बताय
  22. सेहत संजीवनी
  23. भक्ति दान गुरु दीजिए
  24. मन पर जो सवार है ऐसा
    ऐसा विरला कोई
  25. सत्यनाम है सार बूझौ सन्त
    विवेक करि
  26. रोग निवारक
  27. मुक्ति भेद मैं कहौं विचारी
  28. "तेरा बैरी कोई नहीं
    तेरा बैरी मन"
  29. सुरति का खेल सारा है
  30. सार शब्द निहअक्षर सारा
  31. करूँ जगत से न्यार
  32. बिन सत्संग विवेक न होई
  33. सत्य नाम को जनि कर दूजा
    देई बहा
  34. सुरत कमल सदगुरु स्थाना
  35. मनहिं निरंजन सबै नचाए
  36. सत्यपुरुष को जानसी
    तिसका सतगुरु नाम