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मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

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मैं 'मन' ही सकल सृष्टि का करतार हूँ॥

मैं ही शून्य मण्डलों से परे घनघोर अंधकार हूँ॥

मैं ही त्रिदेवों दशावतारों का विधाता ध्यान हूँ॥

मैं ही आत्म शक्ति के बन्धन का जीवों में कर्म विधान हूँ॥

मैं ही माया संग शरीरों में आत्मावरण और ज्ञान हूँ॥

मैं 'मन' ही जीवात्मा की गुण अवगुण पहचान हूँ॥

मैं ही शुभ अशुभ और पुण्य-पाप का सृजक हूँ॥

मैं ही तीरथ व्रत यज्ञ जप तप कर्म निर्माता हूँ॥

मैं ही धर्म अधर्म के जीवन कर्मों का व्याख्याता हूँ॥

मैं ही वैकुण्ठ और स्वर्ग-नरक कर्मफल प्रदाता हूँ॥

मैं 'मन' ही कर्म संचय स्रोत बन जाता हूँ॥

मैं ही एक उज्ज्वल पक्ष, दया करूणा का वरदान हूँ॥

मैं ही जीवों में तम रूप काम-क्रोध की खान हूँ॥

मैं ही तपस्वी ऋषि मुनि योगी का सिद्धिदाता हूँ॥

मैं ही मनुष्य की मनोकामना, सुख-दुःख हो जाता हूँ॥

मैं 'मन' ही जन्म-मरण के क्रम बनाता हूँ॥

मैं ही देव और दानवों का कर्ता जग संचालक हूँ॥

मैं ही योग ध्यान में सिद्धि निधियों का वाहक हूँ॥

मैं ही त्रिकुटि मध्य बसा, दसवें द्वार विराजित हूँ॥