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मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

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दो शब्द संगत की ओर से

आप जब इस संसार में आए, तब महाकलयुग शुरू हो गया था। आम आदमी ही नहीं, भक्ति करने वाला इंसान भी भटक चुका था। आपने आकर केवल धार्मिक क्रांति ही नहीं लाई बल्कि समाज सुधार का काम भी किया। जहाँ धर्म में व्यवसाय, राजनीति, रोमांस आदि ने स्थान ले लिया था, वहीं समाज में हिंसा, छल, कपट, ठगी, बेईमानी, चरित्रहीनता सहित अनेक बुराइयाँ अपनी चरम सीमा तक पहुँच रही थीं। कहीं सयाने बाबे हमारी माँ, बहन, बेटियों को नचा रहे थे तो कहीं नकली ज्योतिषि समाज को भटका रहे थे। आपने समाज को जगाया, बचो इनसे। इसके लिए आपको इस महाकलयुग में पाखण्डियों द्वारा बहुत निंदा झेलनी पड़ी।

कहीं उग्रवादी कहा गया। दुनिया भी कितनी भोली है, मान लिया। फौज में नौकरी करने वाले को उग्रवादी कहा। कितने बेवकूफ थे पाखण्डी। फिर मानने वाले तो भोले भाले थे, विचार भी नहीं किया। कहीं आपको मजनू कहा गया। आप तो किसी स्त्री को स्पर्श तक नहीं करते हैं और न ही आपने शादी की। यदि आपको जरूरत होती तो शादी कर लेते। यह भी किसी ने विचार नहीं किया। कहीं चमार कहा गया। आपके गुरु के लिए भी किसी की यह सोच रही थी। किसी ने उनकी जाति पूछी थी। आपके गुरु जी ने कहा कि जाति पाति पूछे न कोई। हरि को भजे सो हरि का होई।। तो उसने कहा कि यह तो रविदास जी ने कहा था, क्योंकि वे जाति से चमार थे। तब आपका दिल हुआ कि बता दूँ कि गुरु जी ब्राह्मण हैं, पर गुरु जी ने इशारे से मना कर दिया। बाद में कहा कि अपनी जाति बतानी ही नहीं है। आप तो स्वयं साहिब हैं, फिर आपकी जाति जो पूछे वो मूर्ख ही है। फिर पाखण्डियों ने आपको अनेक यातनाएं