महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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सादा
१- दुर्योधन और अर्जुनका श्रीकृष्णसे युद्धके लिये सहायता माँगना
२- नहुषका स्वर्गसे पतन
३- आकाशचारी भगवान् सूर्यदेव
४- विदुर और धृतराष्ट्र
५- प्रह्लादजीका न्याय
६- आत्रेय मुनि और साध्यगण
७- श्रीसनत्सुजात और महाराज धृतराष्ट्र
८- धृतराष्ट्रकी सभामें संजय पाण्डवोंका संदेश सुना रहे हैं
९- भीमसेनका बल बखानते हुए धृतराष्ट्रका विलाप
१०- धृतराष्ट्रके द्वारा श्रीकृष्णका स्वागत
११- श्रीकृष्णका कौरव-सभामें प्रवेश
१४- ययातिका स्वर्गारोहण
१५- दुर्योधनको गान्धारीकी फटकार
१६- भगवान् श्रीकृष्ण कर्णको समझा रहे हैं
१७- पाण्डवोंके डेरेमें बलरामजी
१८- पाण्डवोंकी विशाल सेना
१९- भीष्म-दुर्योधन-संवाद
२०- पाण्डव-सेनापति धृष्टद्युम्न
२१- भीष्म और परशुरामके युद्धमें नारदजीद्वारा बीच-बचाव
२२- शरणागत अर्जुन
२३- पंचमहायज्ञ
२४- अर्जुनके प्रति भगवान्का विराट्रूप-प्रदर्शन
२५- भगवान्के द्वारा भक्तका संसारसागरसे उद्धार
२६- चार अवस्था
२७- संसार-वृक्ष
२८- मोह-नाश
२९- श्रीकृष्ण एवं भाइयोंसहित युधिष्ठिरका भीष्मको प्रणाम करके उनसे युद्धके लिये आज्ञा माँगना
३०- भीमसेन और भीष्मका युद्ध