महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariSanskritpublished2,580 pages
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१. 'अग्नीषोमावुपांशु यष्टव्यावजामित्वाय' इस श्रुतिमें अग्नि और सोमको उपांशु मन्त्रोच्चारणपूर्वक आज्यभाग अर्पण करनेका विधान है। यहाँ सोमके साथ जिस अग्निको आज्यभागका अधिकारी बताया गया है, वह 'वीर' नामक अग्नि ही है।
२. ये वाक्के अभिमानी देवता हैं। 'तस्य वाचा सृष्टौ पृथिवी चाग्निश्च' इस श्रुतिसे भी यही सिद्ध होता है।