माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 68 of 404
Read in context( ५० ) माधवनिदान ।
मतमें छठा अतिसार आमज है जो भयसे उत्पन्न हुआ और आचार्य मानते हैं वह,
हम नहीं मानते अतएव ‘ षष्ठमेनं ’ पुनः कहा है क्योंकि भयादि अतिसारोंका वात
पित्त कफ अतिसारोंके अन्तर्गतत्व है ॥
आमके लक्षण ।
संसृष्टमेभिर्दोषैस्तु न्यस्तमप्स्ववसीदति ।
पुरीषं भृशदुर्गन्धि पिच्छिलं चामसंज्ञितम् ॥ १२ ॥
पूर्व कहे वातादि अतिसारोंके मिलेहुए लक्षणसंयुक्त जो मल वह जलमें गेर-
नेसे डूब जाता है, क्योंकि आम वातजमें भारी है और उसमें बहुत दुर्गंध आती
है तथा अत्यन्त गाढा होता है उसकी आमसंज्ञा है ॥
पक्व लक्षण ।
एतान्येव तु लिङ्गानि विपरीतानि यस्य वै ।
लाघवं च विशेषेण तस्य पक्वं विनिर्दिशेत् ॥ १३ ॥
और ऊपरके श्लोकसे विपरीत लक्षण होवे अर्थात् शरीर हलका हो तथा मल जलमें
डूबे नहीं और दुर्गंधरहित हो, बबूलरहित हो उस रोगीका मल पक्व हुआ जाने ॥
असाध्य लक्षण ।
पक्वं जाम्बवसङ्काशं यकृत्पिण्डनिभं तनु । घृततैलवसामज्जावेस-
वारपयोदधि ॥ १४ ॥ मांसधावनतोयाभं कृष्णं नीलारुण-
प्रभम् । मेचकं कर्बुरं स्निग्धं चन्द्रकोपगतं घनम् ॥ १५॥ कुणपं
मातुलुङ्गाभं दुर्गन्धं कुथितं बहु । तृष्णादाहारुचिश्वासहिक्कापा-
र्श्वास्थिशूलिनम् ॥ १६॥ संमूर्च्छारतिसंमोहयुक्तं पक्ववलीगुदम् ।
प्रलापयुक्तं च भिषग् वर्जयेदातिसारिणम् ॥ १७ ॥
पके जामुनके रंगसदृश काला और चिकना तथा काला और लोहित रंग
पतला घृत तेल चरबी मज्जा वेशंवार दूध दही और मांसके धोनेसे जैसा जल निकले
है ऐसा रंग हो, काजलके रंगसमान अथवा नीलमिश्रित अरुण रंग अर्थात् पपैथा
पक्षीके पंखके रंगसमान अथवा खंजन पक्षीके वर्णसदृश तथा अनेक रंगका चिकना
मोरकी चंद्रिकाके सदृश रंग, दृढ, मुरदाकीसी दुर्गंध युक्त, मस्तककी मज्जाके समान
१ बेशवार नाम—मांसमेंसे हड्डी निकाल और कूटकर दही दूध काली मिरच डालकर
जो पदार्थ बनाते हैं तत्सदृश रंग हो ।