माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextभाषाटीकासमेत । ( २३ )
हृदयका जकडना, थूकना, मुखमें मीठापन, कानोंसे सुनना वाणीसे बोलना
दृष्टिसे देखना बन्द होजाय, यदि इस पुरुषके कफको वैद्य रोके तो अत्यंत कुपित
हुआ पित्त उपद्रव सहित ज्वरको पैदा करे और यदि पित्तको रोकाजाय तो वात
अत्यन्त कुपित होता है और कुपित हुआ वात निराहार पुरुषकी मेदा मज्जा और
हड्डियोंको पीडित करता है। इसमें स्नान करता है और खाता भी है लेकिन तीन
रात नहीं जीता है अर्थात् तीन रातके अन्दर ही मर जाता है यह मेदोगत सन्निपात
(कफण) नामसे कहा है ॥ २८-३२ ॥
मतान्तरभेद ।
कुम्भीपाकः प्रौर्णुनावः प्रलापी ह्यन्तर्दाहो दण्डपातोऽन्तकश्च ।
एणीदाहश्चाथ हारिद्रसंज्ञो भेदा एते सन्निपातज्वरस्य ॥ १ ॥
अजघोषभूतहासौ यन्त्रापीडश्च संन्यासः ।
संशोषी च विशेषास्तस्यैवोक्तास्त्रयोदशान्यत्र ॥ २ ॥
१ कुम्भीपाक, २ प्रौर्णुनाव, ३ प्रलापी, ४ अन्तर्दाह, ५ दण्डपात, ६ अन्तक,
७ एणीदाह, ८ हारिद्रसंज्ञक, ९ अजघोष, १० भूतहास, ११ यन्त्रापीड, १२ संन्यास,
१३ संशोषी ये तेरह प्रकारके संनिपात हैं ॥
इन तेरहोंके क्रमसे लक्षण लिखते हैं-
कुम्भीपाक १ ।
घोणाविवरगलद्बहुशोणासितलोहितं सार्त्ति ।
विलुठनमस्तकमभितः कुम्भीपाकेन पीडितं विद्यात् ॥ १ ॥
जिस पुरुषके नासिकाके छिद्रसे पीला काला लाल गाढा जल बहुत झरता हो
और शिरको चारों तरफ पटकता हो उस पुरुषको कुम्भीपाकसे पीडित जानना चाहिये॥
प्रौर्णुनाव २ ।
उत्क्षिप्य यः स्वमङ्गं क्षिपत्यधस्तान्नितान्तमुच्छ्वसिति ।
तं प्रौर्णुनावजुष्टं विचित्रकष्टं विजानीयात् ॥ २ ॥
जो पुरुष अपने अंगको उठाकर नीचे पटकता है और बहुत जल्दी २ श्वास लेता
है, अनेक प्रकारसे दुःखी उस पुरुषको प्रौर्णुनाव सन्निपातसे ग्रसित जानना चाहिये॥
प्रलापी ३ ।
स्वेदभ्रमाङ्गमर्दाः कम्पो दवथुर्वमिर्व्यथा कण्ठे ।
गात्रं च गुर्वतीव प्रलापिजुष्टस्य जायते लिङ्गम् ॥ ३ ॥
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