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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 390 of 404

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Page 390

( ३७२ ) माधवनिदानका परिशिष्ट ।
दुष्ट रुधिर निकले उसका लिंग अग्निसे दग्धके समान होजाय, मूत्राशय अंडकोश
ऊरुकी सन्धियोंमें घोर दाह और पीडा होय, कभी कभी गाढा और पीला स्राव होय,
सूजन मन्द और गीली होय, तथा थोडा स्राव होय देरमें पके, अथवा शीघ्रही पक
जावे, उसके लिंगमें कीडे पडजायँ, क्लेदयुक्त और दुर्गंध आवे, लिंगके ऊपरकी
सुपारी गलजाय, तथा लिंग और अंडकोश दोनों गलकर गिरजायँ, यह ध्वजभंग-
नपुंसकके लक्षण कहे हैं ॥
कोई सुश्रुतादिक आचार्य इस ध्वजभंग नपुंसकके ईर्ष्यक, सौगन्धिक, कुंभिक,
आसेक्य और महापंढ इन भेदोंसे पांच प्रकारका बतलाते हैं ॥ उनको भी प्रसंग-
बशसे इस जगह सुश्रुतसे लिखते हैं ।
तहां प्रथम आसेक्य नपुंसकके लक्षण ।
पित्रोरत्यल्पवीर्यत्वादासेक्यः पुरुषो भवेत् ।
स शुक्रं प्राश्य लभते ध्वजोच्छ्रायमसंशयम् ॥ १ ॥
मातापिताके अत्यल्पवीर्यसे जो गर्भ रहे वह पुरुष आसेक्यनाम नपुंसक होता है, वह
पुरुष अन्य पुरुषसे अपने मुखमें मैथुन कराकर उसके वीर्यको खा जाय तब उसको
चैतन्य अर्थात् लिंग सत्तर हो तब स्त्रीसे मैथुन करे इसका दूसरा नाम मुखयोनि है ॥
सौगन्धिकनपुंसकके लक्षण ।
यः पूतियोनौ जायेत स सौगन्धिकसंज्ञितः ।
स योनिशेफसोग्न्धमाघ्राय लभते बलम् ॥ २ ॥
जो पुरुष दुष्टयोनिसे उत्पन्न होय, उसको योनि तथा लिंगके सूंघनेसे चैतन्यता प्राप्ति
होय, उसको सौगंधिक कहते हैं, इसका दूसरा पर्यायवाची नाम नासायोनि है ॥
कुम्भिक नपुंसकके लक्षण ।
स्वगुदेऽब्रह्मचर्याद्यः स्त्रीषु पुंवत्प्रवर्तते। कुम्भिकः स तु विज्ञेयः-
जो पुरुष पहले अपनी गुदा भंजन करावे तब उसको चैतन्यता प्राप्त होय तब
स्त्रीके विषयपुरुषके समान प्रवृत्त होय, उसको कुम्भिक नपुंसक कहते हैं । कोई
आचार्य इसका और प्रकारसे अर्थ करते हैं अर्थात् जो पुरुष लोंडेबाजी करते हैं वे
प्रथम स्त्रीके पीछे बैठकर पशुके समान शिथिल लिंगसेही उसकी गुदाभंजन करें,
इस प्रकार करनेसे जब चैतन्यता प्राप्त होती है तब मैथुन करें, उसका नाम कुम्भिक
कहते हैं और गुदायोनी यह इसका पर्यायवाची नाम है। इसकी उत्पत्ति काश्यपने
इस प्रकार लिखी है कि, ऋतुकालमें अल्परजस्क स्त्रीसे श्लेष्म रेतवाले पुरुषके
सम्भोग करनेसे उस स्त्रीका कामदेव शान्त न हो इस कारण उस स्त्रीका मन अन्य
पुरुषसे सम्भोग करनेकी इच्छा करे तब उसको कुम्भिकनामक नपुंसक होता है ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA