माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 373 of 404
Read in contextयहाँ पृष्ठ का पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यंतरण प्रस्तुत है:
भाषाटीकासमेत । ( ३५५)
मूलं पत्रं फलं पुष्पं त्वक्क्षीरं सार एव च ।
निर्यासा धातवश्चैव कन्दश्च दशमः स्मृतः ॥ २ ॥
जड, पात, फल, फूल, छाल, दूध, रस, गोंद, धातु और कन्द ये दश स्थावर
विष हैं। तहां मूलविष आठ-क्लीतक, अश्ममार गुंज, सुगंध, गर्गर, छकरघाट,
विद्युच्छिखा और विजया ये हैं। विषपत्रिका, लम्बावर, दारुक, करम्भ, महाकरंभ
ये पांच पत्रविष हैं। कुमुद्वती, वेणुका, करम्भ, महाकरंभ, कर्काटक, रेणुक, खद्यो-
तक, चमरी, इभगंधा, सर्पघाती, नन्दन, सारपाकिनी ये बारह फलविष हैं। पत्र,
कदंब, वाल्लिज, करम्भ, महाकरम्भ ये पांच पुष्पविष है। अंत्रपाचक, कर्तरीय,
सौरीय, ककरघाट, करम्भ, नन्दन, वराटक ये सात त्वचारस (गोंद) के विष हैं,
कुमुदघ्नी, स्नुही जालक्षीरी ये तीन दूधके विष हैं। फेणाश्मभस्म और हरिताल ये
धातुविष हैं। कालकूट, वत्सनाभ, सर्षपक, पालक, कर्दमक, वैराटक, पुस्तक, भृंगी-
विष प्रपौंडरीक, मूलक, हलाहल, महाविष कर्कट ये तेरह कन्दविष हैं। सब मिल-
कर स्थावर विष पचपन ( ५५ ) हैं ॥
विषके स्थान ।
जंगमस्य विषस्योक्तान्यधिष्ठानानि षोडश ।
समासेन मया यानि विस्तरस्तेषु वक्ष्यते ॥ ३ ॥
जंगम विषके स्थान सोलह हैं, सो मैंने संक्षेपसे कहे हैं, अब विस्तारसे कहता
हूँ-दृष्टि, श्वास, दांत, नख, मूत्र, विष्ठा, शुक्र, लार, आर्तव, मुख, संदंश, विशर्द्दित
( पादना ), गुदा, हड्डी, पित्त, शूकशव ये सोलह स्थान हैं। तहां दृष्टि, निःश्वास
विष दिव्य है सो दिव्य सर्पादिका जानना । भीम विष दंष्ट्राविष है, बिलाव,
कुत्ता, बन्दर, मगर, मेंढक, मच्छी, जलगोधिका, शंबूक (शीप), पचालक, छिप-
करी, मोहारकी मक्खी, पीली मक्खी, ततैय्या इनसे आदि ले ये जनावर दंष्ट्रा
और नख विषवाले हैं । चिंपिठ, पिच्चटक, कषाय, वासिंग, सर्षप, तोटववर्च, कोड-
कौटिल्यक इन जानवरोंके विष्ठा और मूत्रमें विष होता है। इनको लोकप्रसिद्ध
नामसे जानना । मूसेके शुक्रमें विष होता है। मकरी आदि जो कीट है सो लूता
कहे जाते हैं। इनके लार, मूत्र, विष्ठा, मुख, नख, शुक्र, आर्तव इनमें विष होता
है। बिच्छू, विश्वंभर, ततैय्या, राजिलमछली, चिठिंग, समुद्रका बिच्छू इनकी पूंछमें
जो कांटा होता है उसमें विष होता है। चित्रशिर, शरावकुर्दि, शतदारुक, आदि-
मेदक, शारिकामुख, मुखदंशक इनके मूत्रपुरीषमें विष जानना । मक्खी कणव
जोंक इनके मुख और काटनेमें विष है। विषसे मरेहुएकी हड्डी, सर्पकी हड्डी विषेली