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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 362 of 404

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Page 362

( १४४ ) माधवनिदान ।
मूढगर्भकी आठ प्रकारकी गति ।
भुग्नोऽनिलेन विगुणेन ततः स गर्भः संख्यामतीत्य बहुधा
समुपैति योनिम् । द्वारं निरुध्य शिरसा जठरेण कश्चित्कश्चि-
च्छरीरपरिवर्तितकुब्जदेहः ॥ १३ ॥ एकेन कश्चिदपरस्तु
भुजद्वयेन तिर्यग्गतो भवति कश्चिदवाङ्मुखोऽन्यः । पार्श्व-
प्रवृत्तगतिरेति तथैव कश्चिदित्यष्टधा गतिरियं ह्यपरा चतुर्धा
॥ १४ ॥ संकीलकः प्रतिखुरः परिघोऽथ बीजस्तेषूर्ध्वबाहु-
चरणैः शिरसा च योनिम् । सङ्गी च यो भवति कीलकव-
त्सकीलो दृश्यैः खुरैः प्रतिखुरः स हि कायसंगी ॥ १५ ॥
गच्छेद्भुजद्वयशिराः स च बीजकाख्यो योनौ स्थितः स
परिघः परिघेण तुल्यः ॥ १६ ॥
विगुण वायुसे गर्भ विपरीत ( टेढा ) होकर अनेक प्रकार करके योनिके द्वारमें
आकर अडजाय है, उसकी आठ प्रकारकी संज्ञा है, सो इस प्रकार है-१ कोई गर्भ
मस्तकसे योनिके द्वारको बन्द कर देय है, २ कोई पेटसे योनिके मार्गको रोक देय,
३ कोई शरीरके विपरीतपनेसे योनिके मार्गको रोक दे, ४ कोई एक हाथसे योनिके
मार्गको रोक दे, ५ कोई मूढगर्भ दोनों हाथोंको बाहर निकालकर योनिके द्वारको
रोक दे, ६ कोई गर्भ तिरछा होकर योनिके मार्ग रोक दे, ७ कोई गर्भ मन्था-
नाडीके मुडनेसे नीचेको मुख होय, वह योनिके द्वारको रोक दे, ८ उसी प्रकार कोई
पार्श्वभंग ( पसवाडेका भंग ) होनेसे योनिके द्वारको रोक दे, इस प्रकार मूढगर्भके
आठ प्रकारकी गति है। दूसरी चार प्रकारकी गति और होती है, उसको कहते
हैं-१ संकील, २ प्रतिखुर, ३ परिघ, ४ बीज, इनमें जो गर्भ हाथ पैर ऊपरको
कर मस्तकसे योनिको कीलके समान रोक दे उसको संकीलक कहते हैं, जिस
गर्भके हाथ पैर खुरके सदृश बाहर निकल आवें और शरीर योनिके भीतर अटका
रहे उसको प्रतिखुर कहते हैं, जो गर्भ दोनों हाथ और मस्तक आगे करके अटक
जाय उसको बीजक कहते हैं और परिघ ( आगड ) के समान योनिमें गर्भ अटक
जाय उसको परिघ कहते हैं॥
असाध्य मूढगर्भ और गर्भिणीके लक्षण ।
अपविद्धशिरा या तु शीतांगी निरपत्रपा ।
नीलोद्धतशिरा हन्ति सा गर्भं स च तां तथा ॥ १७ ॥