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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 298 of 404

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Page 298

( २८० ) माधवनिदान ।
बाहु ( भुजा ) की जड़, कंधा और पसवाडे इन ठिकाने पित्त कुपित होकर काले
फोडोंसे व्याप्त तथा वेदनायुक्त जो पिडिका होय उसको कक्षा वा कखलाई कहते हैं॥
गन्धमालाके लक्षण ।
एकामेतादृशीं दृष्ट्वा पिडिकां स्फोटसन्निभाम् ।
त्वग्गतां पित्तकोपेन गन्धमालां प्रचक्षते ॥ १५ ॥
पित्तके कोपसे जो कक्षामें कही हुई काले फोडेके समान एक पिडिका त्वचाके
भीतर होय उसको गन्धमाला कहते हैं ॥
अग्निरोहिणी ( काली फुन्सी ) ।
कक्षाभागेषु ये स्फोटा जायन्ते मांसदारुणाः ।
अन्तर्दाहज्वरकरा दीप्तपावकसन्निभाः ॥ १६ ॥
सप्ताहाद् द्वादशाहाद्वा पक्षाद्वा हंति मानवम् ।
तामग्निरोहिणीं विद्यादसाध्यां सान्निपातिकीम् ॥ १७ ॥
कांखके आसपास मांसके विदारण करनेवाले जो फोडे होते हैं तिसकरके अन्त-
र्दाह होय तथा ज्वर होय वे फोडे प्रदीप्त अग्निके समान लाल होयँ, इन फोडोंमें
वायु अधिक होनेसे सात दिन, पित्ताधिक्यसे बारह दिन और कफाधिक्यसे १५
दिनमें रोगी मरे, यह अग्निरोहिणी नामक त्रिदोषजा पिडिका असाध्य है ॥
चिप्पके लक्षण ।
नखमांसमधिष्ठाय वातः पित्तं च देहिनाम् ।
कुर्वाते दाहपाकौ च तं व्याधिं चिप्पमादिशेत् ॥ १८ ॥
वायु और पित्त नखोंके मांसमें स्थित होकर दाह और पाकको करे, इस रोगको
चिप्प ऐसे कहते हैं, यह अल्प दोषोंसे होय तो इसको कुनख कहते हैं ॥
अनुशयीके लक्षण ।
गभीरामल्पसंरम्भां सवर्णामुपरि स्थिताम् ।
पादस्यानुशयीं तां तु विद्यादन्तः प्रपाकिनीम् ॥ १९ ॥
पैरोंमें त्वचाके समान वर्ण यत्किंचित् सूजनयुक्त भीतरसे पकी जो पिडिका होय
उसको अनुशयी कहते हैं ॥
विदारिकाके लक्षण ।
विदारिकन्दवद् वृत्ता कक्षावंक्षणसन्धिषु ।
विदारिका भवेद्रक्ता सर्वजा सर्वलक्षणा ॥ २० ॥

CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA