माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( २६४ ) माधवनिदान ।
वातयुक्त अम्लपित्त, वातकफयुक्त अम्लपित्त और कफयुक्त अम्लपित्त ऐसे
तीन प्रकारका अम्लपित्त बुद्धिमान् वैद्य दोषोंके लक्षणोंसे जाने । कारण इसका यह
है कि, ऊर्ध्वगत अम्लपित्तमें छर्दि (रद्द) रोगका भास होय है और अधोगत
अम्लपित्तमें अतिसारकीसी चेष्टा मालूम होय, इसीसे वैद्यको मोह होय है इसीसे
वैद्यको इस रोगकी सूक्ष्म रीतिसे परीक्षा करनी चाहिये ॥
वातयुक्त अम्लपित्तके लक्षण ।
कम्पप्रलापमूर्च्छाचिमिचिमिगात्रावसादशूलानि ।
तमसो दर्शनविभ्रमविमोहहर्षाश्च वातयुते ॥ ९ ॥
वातयुक्त अम्लपित्तमें कंप, प्रलाप, मूर्च्छा, चिमचिमा (चींटी काटनेसे प्रगट
खुजलीके समान ), देह टूटना, पेट दूखना, नेत्रोंके आगे अन्धकार दीखें, भ्रांति
होना, इन्द्रिय मनको मोह, रोमाञ्च हों ये लक्षण होते हैं ॥
कफयुक्त अम्लपित्तके लक्षण ।
कफनिष्ठीवनगौरवजडताऽरुचिशीतसादवमिलेपाः ।
दहनबलसादकण्डूर्निद्रा चिह्नं कफानुगते ॥ १० ॥
कफयुक्त अम्लपित्तमें कफके ढेले गिरें, शरीरका अत्यन्त भारीपना, इन्द्रियोंमें
जडपना, अरुचि, शीत लगे, अंग टूटना, वमन, मुख कफसे लिपटा रहे, मन्दाग्नि,
बलनाश, खुजली और निद्रा ये लक्षण होते हैं ॥
वातकफयुक्त अम्लपित्तके लक्षण ।
उभयमिदमेव चिह्नं मारुतकफसम्भवे भवत्यम्ले ।
वातकफयुक्त अम्लपित्तमें ऊपर कहे हुए दोनोंके लक्षण होते हैं ॥
कफपित्तके लक्षण ।
भ्रमो मूर्च्छाऽरुचिश्छर्दिरालस्यं च शिरोरुजः ।
प्रसेको मुखमाधुर्यं श्लेष्मपित्तस्य लक्षणम् ॥ ११ ॥
भ्रम, मूर्च्छा, अरुचि, वमन, आलस्य, मस्तकपीडा, मुखसे पानी बहना, मुखमें
मिठास ये कफपित्तके लक्षण हैं ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायाम्
अम्लपित्तनिदानं समाप्तम् ॥
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