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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 279 of 404

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Page 279

भाषाटीकासमेत । ( २६१ )
अथ शीतपित्तोदर्दकोठनिदानम् ।
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शीतपित्तके निदान और संप्राप्ति ।
शीतमारुतसंस्पर्शात्प्रदुष्टौ कफमारुतौ ।
पित्तेन सह संभूय बहिरन्तर्विसर्पतः ॥ १ ॥
शीतलपवनके लगनेसे कफ वायु दुष्ट होकर पित्तसे मिल भीतर रक्तादिकोंमें
और बाहर त्वचा में विचरते हैं ॥
पूर्वरूप ।
पिपासारुचिहृल्लासमोहसादाङ्गगौरवम् ।
रक्तलोचनता तेषां पूर्वरूपस्य लक्षणम् ॥ २ ॥
प्यास, अरुचि, मुखमेंसे पानी गिरना, अंग टूटना और भारी होना, नेत्रमें लाली
ये पूर्वरूप शीतपित्तके जानने ॥
उददर्दके लक्षण ।
वरटीदष्टसंस्थानः शोथः सजायते बहिः ।
सकण्डूस्तोदबहुलश्छर्दिज्वरविदाहवान् ॥ ३ ॥
उदर्दंमिति तं विद्याच्छीतपित्तमथापरे ।
वरटी (ततैया) के काटनेके समान त्वचाके ऊपर चकत्ता होजाय उसमें खुजली
चले और सूई चुभानेकीसी पीडा होय, इसके संयोगसे वमन, ज्वर, सन्ताप और दाह
होय, इस रोगको उदर्द कहते हैं, कोई इसको शीतपित्त कहते हैं, इसको लौकिकमें
पित्ती कहते हैं, इसमें खुजली होय है, सो कफसे जानना, चोटनी बादीसे होय है
और ओकारी सन्ताप और दाह ये पित्तसे होते हैं ऐसे जानना ॥
वाताधिकं शीतपित्तमुदर्दस्तु कफाधिकः ॥ ४ ॥
शीतपित्तमें वात प्रधान तथा उदर्द कफप्रधान जानना ॥
उदर्दका दूसरा धर्म ।
सोत्सङ्गैश्च सरागैश्च कण्डूमद्भिश्च मण्डलैः ।
शैशिरः कफजो व्याधिरुदर्दः परिकीर्तितः ॥ ५ ॥
सरदीसे कफका कोप होकर अंगके ऊपर लाल लाल चकत्ता उठें, उनमें खुजली
बहुत चले और वे मण्डलके आकार गोल हों, बीचमें कुछ नीचे और आसपास
ऊंचे होयँ, इस रोगको उदर्द कहते हैं ॥
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