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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 263 of 404

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Page 263

भाषाटीकासमेत। (२४५)
अथोपवंशनिदानम्।
उपदंशके कारण।
हस्ताभिघातान्नखदन्तघातादधावनादत्यतिसेवनाद्वा।
योनिप्रदोषाच्च भवंति शिश्ने पंचोपदंशा विविधापचारैः॥ १ ॥
हाथकी चोट लगनेसे, नख, दांतके लगनेसे, अच्छी रीतिसे न धोनेसे, अत्यन्त
स्त्रीसंगके करनेसे अथवा योनिके दोषसे अर्थात् दीर्घ कडे बाल जिसके ऊपर होयँ
अथवा खारी गरम जलके धोनेसे, ब्रह्मचर्यवाली स्त्रीसे गमन करनेसे इत्यादिक
कारणोंसे लिंगमें उपदंश (गर्मीका रोग) होय है। वह पांच प्रकारका है॥
वातोपदंशके लक्षण।
सतोदभेदस्फुरणैः सकृष्णैः स्फोटैर्व्यवस्येत्पवनोपदंशम्।
लिंगेन्द्रियके ऊपर काले फोडे उठे, उनमें चोटनेकीसी पीडा होय, तोडनेकीसी
पीडा होय और स्फुरण ये लक्षण वातोपदंशके जानने॥
पित्तोपदंश व रक्तोपदंशके लक्षण।
पीतैर्बहुक्लेदयुतैः सदाहैः पित्तेन रक्तात्पिशितावभासैः॥ २ ॥
पित्तके उपदंशकरके पीले रंगके फोडे होते हैं। उनमेंसे पानी बहुत बहै, दाह
होय, रुधिरके उपदंशसे मांसके समान लाल रंगके फोडे होयँ॥
कफोपदंशके लक्षण।
सकण्डुरैः शोथयुतैर्महद्भिः शुक्लैर्घनस्रावयुतैः कफेन।
कफके उपदंश करके सफेद मोटे फोडे होयँ, उनमें खुजली चले, सूजन होय
और गाढी राध बहै॥
सन्निपातोपदंशके लक्षण।
नानाविधस्रावरुजोपपन्नमसाध्यमाहुस्त्रिमलोपदंशम्॥ ३ ॥
जिस उपदंशमें अनेक प्रकारका स्राव होय, पीडा होय यह त्रिदोषज उपदंश
असाध्य है॥
असाध्य लक्षण।
विशीर्णमांसं कृमिभिः प्रजग्धं मुष्कावशेषं परिवर्जयेत्तु।
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