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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 230 of 404

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Page 230

( २१२ ) माधवनिदान ।
कफसे अंडवृद्धि शीतल, भारी, चिकनी तथा खुजलीयुक्त कठिन और थोडी
पीडायुक्त होय है ॥
रक्तजवृद्धिके लक्षण ।
कृष्णस्फोटावृतः पित्तवृद्धिर्लिङ्गैश्च पित्तजः ।
काले फोडाओंसे व्याप्त तथा जिसमें पित्तवृद्धिके लक्षण मिलते होयँ, उस अण्ड-
वृद्धिको पित्तकी तथा रक्तकी कहते हैं ॥
मेदोजअंडवृद्धिके लक्षण ।
कफवन्मेदसो वृद्धिर्मृदुस्तालफलोपमः ॥ ५ ॥
मेदसे जो अंडवृद्धि होय है वह कफकी वृद्धिके समान मृदु ( नरम ) तथा ताल-
फलके समान हो अर्थात् पीले रंगकी और गोल होय ॥
मूत्रवृद्धिके लक्षण ।
मूत्रधारणशीलस्य मूत्रजः स च गच्छति ।
अम्भोभिः पूर्णदृतिवत्क्षोभं याति सरुङ्मृदुः ॥
मूत्रकृच्छ्रमधः स्याच्च चालयन्फलकोशयोः ॥ ६ ॥
मूत्रको रोकनेका जिसका स्वभाव होय उसको यह रोग होय है, वह पुरुष जब
चले तब पानीसे भरी पखालके समान डबक डबक हले तथा बजे, उसमें और
पीडा थोडी होय, हाथके छूनेसे नरम मालूम होय, उसमें मूत्रकृच्छकीसी पीडा होय,
फल और कोश दोनों इधर उधर चलायमान होयँ ॥
अन्त्रवृद्धिके लक्षण ।
वातकोपिभिराहारैः शीततोयावगाहनैः ।
धारणेरणभाराध्वविषममार्गप्रवर्तनैः ॥ ७ ॥
क्षोभणैः क्षुभितोऽन्यैश्च क्षुद्रान्त्रावयवं यदा ।
पवनो विगुणीकृत्य स्वनिवेशादधो नयेत् ॥
कुर्याद्वंक्षणसन्धिस्थो ग्रन्थाभं श्वयथुं तदा ॥ ८ ॥
वातकोपककारक आहारके सेवन करनेसे, शीतल जलमें प्रवेश करके स्नान करनेसे,
उपस्थित मूत्रादिवेगोंके धारण करनेसे, अप्राप्त वेग अर्थात् करनेकी इच्छा न होय
उसको बलपूर्वक प्रेरणा करनेसे, भारी बोझके उठानेसे, अति मार्गके चलनेसे
अंगोंकी विषम चेष्टा ( अर्थात् टेढा तिरछा अंगोंकरके गमनादिक करना ), बल
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