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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 228 of 404

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Page 228

(२१०) माधवनिदान ।
असाध्यलक्षण ।
श्वासः पिपासा छर्दिश्च दौर्बल्यं ज्वर एव च ।
यस्य चान्ने रुचिर्नास्ति शोथिनं परिवर्जयेत् ॥ १८ ॥
श्वास, प्यास, वमन, दुर्बलता, ज्वर ये लक्षण होयें और जिसकी अन्नमें अरुचि
होय ऐसे सूजनवाले रोगीको वैद्य त्याग दे ॥
अनन्योपद्रवकृतः शोथः पादसमुत्थितः ।
पुरुषं हन्ति नारीं तु मुखजो गुह्यजो द्वयम् ॥
नवोऽनुपद्रवः शोथः साध्योऽसाध्यः पुरेरितः ॥ १९ ॥
अन्यरोगोंके उपद्रवसे प्रगट न भई हो अर्थात् शोथकेही उपद्रवसे पैदा हुई ऐसी
सूजन पहिले पैरोंमें उत्पन्न हो फिर मुखआदि ऊपरके स्थानोंमें प्राप्त होय (उसको
उलटी सूजन कहते हैं) वह पुरुषका नाश करे और जो प्रथम मुखपर होकर पीछे
पैरोंपे उतरे वह सूजन स्त्रियोंको घातक है और जो प्रथम बस्तिमें होकर सब देहमें
व्याप्त हो वह स्त्रीपुरुष दोनोंकी नाशक है। नवीन और उपद्रवरहित जो सूजन होय
वह साध्य और “अधोऽङ्गेऽरिष्टभूतः” इत्यादि श्लोकमें कही हुई सूजन असाध्य है ॥
शोथके उपद्रव ।
छर्दिस्तृष्णाऽरुचिः श्वासो ज्वरोऽतीसार एव च ।
सप्तकोऽयं सदौर्बल्यः शोथोपद्रवसंग्रहः ॥ २० ॥
छर्दी, प्यास, अरुचि, श्वास, ज्वर, अतिसार, दुर्बलता ये सात सूजनके उपद्रव हैं
यह चरकमें लिखा है ॥
विवर्जयेत्कुक्ष्युदराश्रितं च तथा गले मर्मणि संश्रितं च ।
स्थूलः खरश्चापि भवेद्विवर्ज्यो यश्चापि बालस्थविराबलानाम् ॥२१॥
जो सूजन कोख और उदरमें हो तथा कण्ठ और मर्मस्थानमें हो, मोटी और
खरखरी हो तो असाध्य जाननी चाहिये, बालक तथा वृद्ध स्त्रीके भी स्थूल और
खरखरी हुई सूजन असाध्य जानकर छोड देनी चाहिये ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
शोथरोगनिदानं समाप्तम् ॥
१ अनन्यस्य उपद्रवास्तद्विपरीता अनन्योपद्रवाः। एतेनायमर्थः-शोथस्यैव ये उपद्रवास्तैः कृतः
अथवा अन्यमुपद्रवं करोतीत्यन्योपद्रवकृत् नान्योपद्रवकृदित्यनन्योपद्रवकृत्ततोऽनन्योपद्रवकृत
स्वनिदानाजात इति शेषः। २ “यस्तु पादाभिनिर्वृत्तः शोथः सर्वाङ्गजो भवेत् । पुरुषं हन्ति
नारीं च मुखजो गुह्यजो द्वयम् ॥”
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