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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 191 of 404

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Page 191

भाषाटीकासमेत । ( १७३ )
डकार बहुत आवै, मलका अवरोध होय, अन्नमें अरुचि होय, सामर्थ्यका नाश
होना, आंत बोले, पेटमें गुडगुड शब्द होय और अफरा होय, मंदाग्नि होना
ये लक्षण होयं तो जानना कि, गुल्म ( गोला ) रोग शीघ्र प्रगट होना चाहता है
अर्थात् ये गुल्मके पूर्वरूपके लक्षण हैं ॥
गुल्मके साधारण लक्षण ।
अरुचिः कृच्छ्रविण्मूत्रं वातेनान्त्रविकूजनम् ।
आनाहश्चोर्ध्ववातत्वं सर्वगुल्मेषु लक्षयेत् ॥ ५ ॥
अरुचि, मल-मूत्र कष्टसे उतरें, वादीसे आंत बोले, पेट फूल आवे, ऊर्ध्ववात
होय ये लक्षण सब गुल्मोंमें होते हैं । सब गुल्मरोगमें वात कारण है सो चरक और
सुश्रुतमें भी लिखा है ॥
वातगुल्मके कारण और लक्षण ।
रूक्षान्नपानं विषमातिमात्रं विचेष्टनं वेगविनिग्रहश्च ।
शोकाभिघातोऽतिमलक्षयश्च निरन्नता चानिलगुल्महेतुः ॥ ६ ॥
यः स्थानसंस्थानरुजा विकल्पं विद्वातसङ्गं गलवक्त्रशोषम् ।
श्यावारुणत्वं शिशिरज्वरं च हृत्कुक्षिपार्श्वांसशिरोरुजं च ॥ ७॥
करोति जीर्णेऽप्यधिकं च कोपं भुक्ते मृदुत्वं समुपैति पश्चात् ।
वातात्स गुल्मो न च तत्र रूक्षं कषायतिक्तं कटु चोपशेते ॥ ८॥
रूखा, विषम और अतिमात्र ऐसे अन्नपान सेवन करनेसे, बलवान् पुरुषसे
लडना, मल मूत्र आदि वेगोंके धारण करनेसे, शोक और अभिघात ( लकडी
आदिकी चोट ) से, विरेचन आदिसे, मलका क्षय करना, उपवास ये सब वात-
गुल्मके कारण हैं । जो गुल्म कभी नाभि, बस्ती, पसवाडेमें चला जाय तथा कभी
लंबा कभी मोटा गोल अथवा छोटा होय, तथा उसमें पीडा कभी थोडी कभी
बहुत होय, तोद भेद ( सुई चुभानेकीसी पीडा ) होय अथवा अनेक प्रकारकी
पीडा होय, मलकी और अधोवायुकी अच्छी रीतिसे प्रवृत्ति होय नहीं, गला और
मुख सूखै, शरीरका वर्ण नीला अथवा लाल होय, शीतज्वर, हृदय, कूख, पसवाडे,
कंधा और मस्तक इनमें पीडा होय और गोला जीर्ण होनेपर अधिक कोप करे
१ गुल्मिनामनिलशांतिरुपायैः सर्वशो विविधदाचरणीया । मारुतेऽत्र विजितेऽन्यमुदीर्णं
दोषमल्पमपि कर्म निहन्यात् ॥ इति । २ कुपिताऽनिलमूलत्वादगूढमूलोदयादपि । गुल्मवद्वा
विशालत्वाद् गुल्म इत्यभिधीयते ॥ इति ।