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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 189 of 404

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Page 189

भाषाटीकासमेत । ( १७१ )
रूखा, कसैला, तीखा और कडुवा ऐसे भोजन करनेसे कोष्ठगत वायु मल, मूत्र,
अश्रुपात, कफ और मेद इनके बहनेवाली नाडियोंके मार्गको रोकदे, मलको
सुखाय दे, तब रोगी हृदय मूत्रस्थानमें शूलके होनेसे विकल हो, सूखी रह, अस्व-
स्थपना इनसे पीडित हो, मलमूत्र और वात ये कष्टसे उतरें और श्वास, खांसी,
पीनस, दाह, मोह, प्यास, ज्वर, वमन, हिचकी, मस्तकरोग, मनकी भ्रांति, मन्द सुने
तथा वातकोपसे और भी बहुतसे विकार होयं ॥
आनाहरोगनिदान ।
आमं शकृद्वा निचितं क्रमेण भूयो विबद्धं विगुणानेलेन ।
प्रवर्तमानं न यथास्वमेनं विकारमानाहमुदाहरन्ति ॥ १ ॥
तस्मिन्भवत्यामसमुद्भवे तु तृष्णाप्रतिश्यायशिरोविदाहाः ।
आमाशये शूलमथो गुरुत्वं हृत्स्तंभ उद्गारविघातनं च ॥ २ ॥
स्तंभः कटीपृष्ठपुरीषमूत्रे शूलोऽथ मूर्च्छा शकृतश्च छर्दिः ।
श्वासश्च पक्वाशयजे भवन्ति तथाऽलसोक्तानि च लक्षणानि ॥३॥
आम अथवा पुरीष क्रमसे संचित हो विगुण वायुसे बारंबार विबद्ध होकर अपने
मार्गसे अच्छी रीतिसे प्रवृत्त होय नहीं, इस विकारको आनाह कहते हैं । आमसे
प्रगट अनाहरोगसे प्यास, पीनस, मस्तकमें दाह, आमाशयमें शूल, देहमें भारीपना,
हृदयका जकड जाना, शूल, मूर्च्छा, डकार, कमर, पीठ, मल, मूत्र इनका रुकना,
शूल, मूर्च्छा और विष्ठा मिलीहुई रह और श्वास ये लक्षण होयं । पक्वाशयमें आनाह
रोग होनेसे अलसकरोगोक्त लक्षण ( आध्मानवातोरोधादिक ) होते हैं ॥
असाध्य लक्षण ।
तृष्णार्दितं परिक्लिष्टं क्षीणं शूलैरुपद्रुतम् ।
शकृद्वमन्तं मतिमानुदावर्तिनमुत्सृजेत् ॥ ४ ॥
प्याससे पीडित, क्लेशयुक्त, क्षीण, शूलसे पीडित और मलको रह करनेवाला ऐसे
उदावर्त्तरोगीको वैद्य त्याग दे ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषा-
टीकायामुदावर्त्तनिदानं समाप्तम् ॥
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