माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( १४८ ) माधवनिदान ।
चिबुकदन्तानां तस्मिन् पार्श्वे च वेदना । तमर्दितमिति
प्राहुर्व्याधि व्याधिविशारदाः ॥ ४७ ॥
ऊंचे स्वरसे वेदादिकका पाठ करनेसे अथवा कठिन पदार्थ सुपारी आदिके
खानेसे, बहुत हँसनेसे, बहुत जंभाईके लेनेसे, बोझा ढोनेसे, ऊंचे नीचे स्थानमें
सोनेसे कोपको प्राप्त भई वायु मस्तक, नाक, होठ, ठोडी, ललाट और नेत्र इनकी
संधियोंमें प्राप्त हो मुखमें पीडा करे, अर्दित रोग उत्पन्न हुए उस पुरुषका मुख
आधा टेढा होजाय, ग्रीवा ( नाड ) टेढी होजाय, मस्तक हिला करे, अच्छी तरह
बोला जाय नहीं, नेत्र, भ्रुकुटी, गाल इनकी विकृति कहिये पीडा, फरकना, टेढा
होना इत्यादि होयँ और जिस तरफ अर्दित रोग होय उस तरफ नाड, ठोडी और
दांत इनमें पीडा होय । व्याधि जाननेमें जो कुशल वैद्य हैं वे इस व्याधिको अर्दित-
रोग ऐसे कहते हैं। शंका-क्योंजी ! अर्दित रोगमें और पक्षाघातमें क्या भेद है ?
उत्तर-वेग होनेसे अर्दितरोगमें कभी १ पीडा होती है और पक्षाघातमें सदा पीडा
होती है। अर्दितरोग चार प्रकारका है ॥
अर्दितरोगके असाध्य लक्षण ।
क्षीणस्याऽनिमिषाक्षस्य प्रसक्ताव्यक्तभाषिणः ।
न सिध्यत्यर्दितं गाढं त्रिवर्षं वेपनस्य च ॥ ४८ ॥
क्षीण पुरुषके, पलक नहीं लगे ऐसे पुरुषके अत्यन्त शुद्ध बोले नहीं ऐसे पुरुषके,
अर्दित रोगको प्रगट भये तीन वर्ष व्यतीत होगये हों अथवा त्रिवर्ष कहिये मुख,
नाक और नेत्र इन तीनोंका स्राव होय ऐसा और कम्पयुक्त पुरुषको अर्दितरोग
साध्य नहीं होय ॥
अब आक्षेपकसे लेकर अर्दितपर्यन्त रोगोंका वेग कहते हैं-
गते वेगे भवेत्स्वास्थ्यं सर्वेष्वाक्षेपकादिषु ।
आक्षेपकादि सब वातरोगोंमें वेग शांत होनेसे स्वास्थ्य कहिये पीडा कम होय
जैसे मस्तकके ऊपरका भार ( बोझा ) उतारनेसे सुखकी प्राप्ति होती है ॥
हनुग्रहके लक्षण ।
जिह्वानिर्लेखनाच्छुष्कभक्षणादभिघाततः ।
कुपितो हनुमूलस्थः स्रंसयित्वाऽनिलो हनुम् ॥ ४९ ॥
१ अथवा यथोक्त सब लक्षणयुक्त अर्दितरोग है उससे विपरीत अर्धांगवातके लक्षण जानने।
परन्तु सुश्रुतमें मुखमात्रमें ही अर्दितरोग लिखा है। अर्धशरीरको अर्धांगवात करके लब्ध होनेसे
नहीं लिखा, सोई माधवने पाठ लिखा है ।