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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 160 of 404

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Page 160

( १४२ ) माधवनिदान ।
आमाशयस्थित वायुके कार्य ।
रुक्पार्श्वोदरहृन्नाभेस्तृष्णोद्गारविषूचिकाः ।
कासः कण्ठास्यशोषश्च श्वासश्चामाशये स्थिते ॥ १३ ॥
वायु आमाशयमें स्थित होनेसे पसवाडा, उदर, हृदय और नाभि इनमें पीडा
होय, प्यास, डकार और हैजा ( मुख और गुदाके द्वारा अन्नकी प्रवृत्ति ) खांसी,
कण्ठ, मुखका सूखना, श्वास ये लक्षण होते हैं ॥
पक्वाशयस्थ वायुके कार्य ।
पक्वाशयस्थोऽन्त्रकूजं शूलाटोपौ करोति च ।
कृच्छ्रमूत्रपुरीषत्वमानाहं त्रिकवेदनाम् ॥ १४ ॥
वायु पक्वाशयमें होय तो आंतोंका गूझना, शूल, आटोप, गुडगुडाशब्द, मल मूत्र
कष्टसे निकले, अफरा, त्रिकस्थानमें पीडा इन लक्षणोंको करे ॥
इन्द्रियोंमें स्थित वायुके कार्य ।
श्रोत्रादिष्विन्द्रियवधं कुर्यात्क्रुद्धः समीरणः ।
कानसे आदि जो और इंद्रियें हैं उनमें कुपित वायु यदि स्थित होय तो इंद्रि-
योंका नाश करै ॥
रसधातुगत वायुके लक्षण ।
त्वग्रूक्षा स्फुटिता सुप्ता कृशा कृष्णा च तुद्यते ।
आतन्द्यते सरागा च मर्मरुक्त्वग्गतेऽनिले ॥ १५ ॥
वायु त्वग्गत अर्थात् धातुरूप त्वचामें प्राप्त होनेसे त्वचा रूखी और फटी शून्य
कर्कश और काली हो जाय और उसमें चमका चले तथा तन जाय, कुछ तांबेके
समान लाल होजाय और हृदयादि मर्मोंमें पीडा होय ॥
रक्तगत वायुके लक्षण ।
रुजस्तीव्राः ससन्तापा वैवर्ण्यं कृशताऽरुचिः ।
गात्रे चारूंषि भुक्तस्य स्तंभश्चासृग्गतेऽनिले ॥ १६ ॥
वायु रुधिरमिश्रित होनेसे सन्तापयुक्त तीव्रवेदना होय, देहकी विवर्णता होय,
कृशता, अरुचि और देहमें फोडा तथा भोजन करनेके उपरान्त देहका जकड
जाना ये लक्षण होते हैं ॥
मांसमेदोगत वायुके लक्षण ।
गुर्वङ्गं तुद्यते स्तब्धं दण्डमुष्टिहतं यथा ।
सरुक् श्रमितमत्यर्थं मांसमे दोगतेऽनिले ॥ १७ ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA