Skip to content
SarvaKosh
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 154 of 404

Read in context
Page 154

( १३६ ) माधवनिदान ।
अथापस्मारनिदानम् ।
प्रथम सुश्रुतोक्त इस रोगकी निरुक्ति लिखते हैं-
स्मृतिर्भूतार्थविज्ञानमपस्तत्परिवर्जने ।
अपस्मार इति प्रोक्तस्ततोऽयं व्याधिरन्तकृत् ॥ १ ॥
स्मृतिशब्द प्राणियोंके अर्थज्ञानको कहता है और अपशब्द उसका नाशक है
इसीसे स्मृति और अप इन दोनों शब्दोंसे अपस्मार यह शब्द सिद्ध हुआ । इसी
पूर्वोक्त हेतुके नाशसे यह रोग जलादिकके विषे प्रवेश होनेसे प्राणान्तकारक है ॥
अपस्मारकी निदानपूर्वक सम्प्राप्ति ।
चिन्ताशोकादिभिर्दोषाः क्रुद्धा हृत्स्रोतसि स्थिताः ।
कृत्वा स्मृतेरपध्वंसमपस्मारं प्रकुर्वते ॥ २ ॥
चिन्ता, शोक, आदिशब्दसे क्रोध, लोभ, मोहादिसे कुपित भये जो दोष ( वात,
पित्त, कफ ) सो हृदयमें स्थित जो मनके बहनेवाली नाडी उनमें प्राप्त हो स्मरण
( ज्ञान ) का नाश कर अपस्माररोगको प्रगट करे ॥
वाग्भटके मतसे निदान ।
मिथ्यायोगेन्द्रियार्थानां कर्मणामतिसेवनात् । निरुद्धमलिनां
कर्मविहारकुपितैर्मलैः ॥ ३ ॥ वेगनिग्रहशीलानामहताशुचि-
भोजिनाम् । रजस्तमोभिभूतानां गच्छतां वा रजस्वलाम् ।
तथा कामभयोद्वेगक्रोधशोकादिभिर्भृशम् । चेतसोऽभिभवैः
पुंसामपस्मारोऽभिजायते ॥ ४ ॥
इन्द्रियोंके अर्थ कहिये विषय और कर्म, उनका मिथ्यायोग, अतियोग और
अयोगके सेवन करनेसे तथा निरुद्धमल भोजन और विहारसे कुपित भये जो दोष
उनसे तथा मूत्रमलादि वेगोंके धारण करनेवालोंके अहित और अपवित्र भोजन
करनेसे रजोगुणी मनुष्योंके, रजस्वला स्त्रीगमन करनेसे तथा काम, भय, उद्वेग,
क्रोध, शोक इन कारणोंसे, चित्त ( मन ) के बिगडनेसे मनुष्योंके अपस्माररोग
प्रगट होता है । तहां श्रवण, स्पर्शन, दर्शन, रसन, घ्राण ये इंद्रियोंके अर्थ हैं ।
शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध ये इन्द्रियोंके विषय हैं । इनके अतिसेवनसे
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA