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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 152 of 404

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Page 152

( १३४ ) माधवनिदान ।

देव, ब्राह्मण, गुरुसे द्वेषकर्त्ता, वेद और वेदके अंग ( शिक्षा, कल्प, व्याकरण
आदि ) को पढा भया, पवित्र रहनेवाला, शीघ्र पीडाका कर्त्ता, हिंसा करे नहीं ये
लक्षण ब्रह्मराक्षसजुष्ट मनुष्यके हैं ॥
भूतोन्मादके लक्षण ।
महापराक्रमो यश्च दिव्यं ज्ञानं च भाषते ।
उन्मादकालानैश्चित्यो भूतोन्मादी स उच्यते ॥ २७ ॥
महापराक्रमी और जो श्रेष्ठज्ञानको कहे और जो उन्मादकालका निश्चय न होय
उसको भूतोन्मादी कहते हैं ॥
अब कहते हैं कि, देवादिकग्रह इस मनुष्यको तीन कार्यके वास्ते ग्रहण करते हैं,
हिंसा अर्थात् मारनेके निमित्त और पूजाके निमित्त तथा विहारके निमित्त । इनमें
हिंसाके निमित्त ग्रस्त मनुष्य साध्य (अच्छा) नहीं होय उसके लक्षण आगे कहते हैं॥
स्थूलाक्षो द्रुतमटनः सफेनलेही निद्रालुः पतति च कम्पते
च यो हि । यश्चाद्रिद्विरदनगादिविच्युतः स्यात्सोऽसाध्यो
भवति तथा त्रयोदशेऽब्दे ॥ २८ ॥
नेत्र भयानक होजायँ, शीघ्र चले, मुखमें जो झाग है उसको चाटनेवाला और
जिसको निद्रा बहुत आवे तथा गिरपडे, काँपे और जो पर्वत, हाथी ( अथवा ) नग
नाम वृक्ष, आदिशब्दसे भीत मन्दिर आदि जानने, इनसे गिरकर ग्रहग्रस्त होय वह
असाध्य है । तैसेही तेरहवें वर्षमें सर्व देवादि उन्मादी असाध्य जानने । विदेहने
विशेष लक्षण कहे हैं सो ग्रन्थान्तरोंसे जानलेवे ॥
देवादिकोंका आवेशसमय ।
देवग्रहाः पौर्णमास्यामसुराः सन्ध्ययोरपि ।
गन्धर्वाः प्रायशोऽष्टम्यां यक्षाश्च प्रतिपद्यथ ॥ २९ ॥
पितृग्रहास्तथा दर्श पञ्चम्यामपि चोरगाः ।
रक्षांसि रात्रौ पैशाचाश्चतुर्दश्यां विशन्ति हि ॥ ३० ॥
देवग्रह पूर्णमासीको प्रवेश करते हैं, असुरग्रह सायंकालमें, अपिशब्दसे पूर्णमा-
सीको भी प्रवेश करते हैं, गन्धर्वग्रह बहुधा अष्टमीको, प्रायःशब्दसे सन्ध्याको भी
गन्धर्व ग्रह प्रवेश करते हैं, यक्षग्रह पडवाको, पितृग्रह अमावश्याको, सर्पग्रह पंचमीको,
अपिशब्दसे अमावास्याको भी प्रवेश करते हैं, राक्षस रात्रिमें और पिशाच चतु-

१ सन्ध्या त्रिनाडीप्रमिताऽर्कबिम्बादद्धॉदितास्तादध ऊर्ध्वमत्र । इति ॥