कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextपारिभाषिक शब्दावली
प्राचीन भारत की राजनीति और शासन के क्षेत्र में आचार्य कौटिल्य का अर्थ-शास्त्र एक विश्वकोश जितना महत्त्व रखता है। उसमें धर्म, कर्म, शिक्षा, नीति, समाज, विज्ञान, कृषि, चिकित्सा और यहाँ तक कि मन्त्र-तन्त्र आदि जितने भी विषय हैं उन सभी का समावेश है। इस सर्वांगीण और सर्वतोमुखी विशिष्टता के कारण अर्थशास्त्र की शब्दावली में अनेकता के दर्शन होते हैं।
अर्थशास्त्र-विषयक पुरातन उद्देश्य को दृष्टि में रख कर यहाँ लगभग पौने आठ सौ शब्दों की एक सूची इस हेतु दी जा रही है कि शासन के विभिन्न क्षेत्रों में अंग्रेजी शब्दों के स्थान पर जो भारतीय भाषाओं और विशेषतया संस्कृत भाषा के शब्दों का नवीनीकरण हुआ है, अर्थशास्त्र के पाठकों को उसकी जानकारी प्राप्त हो सके।
प्राचीन अर्थशास्त्र का महत्त्व वर्त्तमान शासन-संबंधी सभी कार्यक्षेत्रों में व्याप्त है। इस दृष्टि से और आचार्य कौटिल्य की सर्वथा वैयक्तिक विचारधारा को समझने के लिए भी यह पारिभाषिक शब्दावली उपयोगी सिद्ध होगी।
यह शब्दावली सरकार के शिक्षा-विभाग से तैयार की गयी पारिभाषिक शब्द-सूचियों, श्री मोनियर विलियम्स, श्री वामन शिवराम आप्टे, श्री लक्ष्मण शास्त्री, राहुलजी तथा डा० रघुवीर के शब्दकोशों, डा० शामशास्त्री, एवं महामहोपाध्याय गणपति शास्त्री कृत अर्थशास्त्र के अंग्रेजी, संस्कृत अनुवादों और डा० जायसवाल की पुस्तक हिन्दू पॉलिटी पर आधारित है।
अ
| अंकनी—लेखनी—पेंसिल | अंतिमेत्यम्—अंतिम चेतावनी—अल्टिमेटम |
| अंकयमित—मुहर लगा पत्र—स्टांप्ड | अंशधर—हिस्सेदार—शेयर होल्डर |
| अंकेक्षित लेखा—लेखा-परीक्षक द्वारा जाँच किया हुआ हिसाब—ऑडिटेड एकाउंट | अकृतक्षेत्र—कृषि के अयोग्य भूमि |
| अंगरक्षक—शरीररक्षक—बॉडीगार्ड | अकृषित—जो भूमि जोती-बोई न गई हो—अनकल्टिवेटेड |
| अंतग्रस्त—विपत्तिग्रस्त—इंवाल्व्ड | अक्ष—धुरी-एक्सिस |
| अंतपाल राज्य—दो देशों की सीमाओं के बीच स्थित राज्य—बफर स्टेट | अक्षपटल—आय-व्यय के लेखे का प्रधान, विभाग या कर्मचारी ( पटल—अधिदेवन ) |
| अंतरंग सचिव—निजी सचिव—प्राइवेट सेक्रेटरी | अक्षपटलाध्यक्ष—महागणक, महागणनिक—एकाउंटेंट जनरल |
| अंतर्वाणिज्य—आभ्यंतर व्यापार—इंटरनल ट्रेड | अक्षशाला—सुवर्ण आदि का शोधन करने एवं गणना करने वालों का स्थान |
५१ कौ०