Skip to content
SarvaKosh
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 765 of 918

Read in context
Page 765

प्र० १६२ : अ० १ ] दूतकर्म ६८१

(१) स चेद्दण्डसन्धि याचेत, कुण्ठमस्मै हस्त्यश्वं दद्यात् । उत्साहितं वा गरयुक्तम् ।
(२) पुरुषसन्धि याचेत, दूष्यामित्राटवीबलमस्मै दद्याद्योगपुरुषाधिष्ठितम् । तथा कुर्याद्यथोभयविनाशः स्यात् । तीक्ष्णबलं वाऽस्मै दद्यात्, यदवमानितं विकुर्वीत । मौलमनुरक्तं वा, यदस्य व्यसनेऽपकुर्यात् ।
(३) कोशसन्धि याचेत, सारमस्मै दद्यात् । यस्य क्रेतारं नाधिगच्छेत्; कुप्यमयुद्धयोग्यं वा ।
(४) भूमिसन्धि याचेत, प्रत्यादेयां नित्यामित्रामनपाश्रयां महाक्षयव्ययनिवेशां वास्मै भूमिं दद्यात् ।
(५) सर्वस्वेन वा राजधानीवर्जेन सन्धि याचेत बलीयसः ।


संधि की याचना करनी चाहिए। यदि वह इतने पर भी रजामंद न हो और चढ़ाई करने पर ही आमादा हो तो पूर्वप्रतिज्ञात धन में अपने कोष तथा सेना का चौथाई भाग अधिक बढ़ाकर उससे संधि के लिए याचना करनी चाहिए।

( १ ) यदि वह बलवान् अभियुक्ता संधि की शर्तों में केवल सेना को ही लेना चाहे तो सर्वथा अशक्त हाथी, घोड़े अथवा विष खिलाकर सशक्त हाथी, घोड़े देकर संधि कर लेनी चाहिए ।

( २ ) यदि वह संधि की शर्तों में पैदल सेना की माँग करे तो अपने गुप्तचरों को साथ मिलाकर दूष्यबल, शत्रुबल तथा आटविकबल शर्तनामा में देने चाहिए और इस प्रकार का प्रबंध करे कि अपनी वे दूष्य आदि सेनायें तथा शत्रु की सेनायें नष्ट हो जायें । अथवा ऐसे तीक्ष्ण बल को देना चाहिए जो थोड़ी सी बात पर बिगड़ उठे और शत्रु का अपकार करने के लिए तैयार हो जाय । अथवा वंशपरंपरा से चली आती अनुरक्त तथा विश्वासी सेना को संधि में देना चाहिए, जो आपत्ति के समय शत्रु का अपकार कर सके ।

( ३ ) यदि अभियुक्ता संधि के बदले में धन लेना पसंद करे तो ऐसे बहुमूल्य रत्न आदि दिये जायें, जिन्हें कोई न खरीद सके अथवा ऐसा सामान दिया जाय जो युद्ध में काम न आ सके ।

( ४ ) यदि अभियुक्ता भूमिसंधि की माँग करे तो उसको ऐसी भूमि दी जाय, जिसको आसानी से वापस लिया जा सके अथवा जिसके स्थायी शत्रु हों या जिसमें कोई दुर्ग न हो और जिसमें अधिक क्षय-व्यय की आशंका हो ।

( ५ ) अथवा जो अत्यंत बलवान् अभियुक्ता हो उसको राजधानी के अलावा अपना सर्वस्व देकर, उससे संधि कर लेनी चाहिए ।