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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 758 of 918

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Page 758

६७४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ ग्यारहवां अधिकरण

सिद्धव्यञ्जनो दूष्यः सङ्घमुख्यमध्ये प्रक्रोशेत—‘असौ मे मुख्यां भार्यां स्नुषां भगिनीं दुहितरं वाधिचरति’ इति । तं चेत्सङ्घो निगृह्णीयात्, राजैनमुपगृह्य विगुणेषु विक्रमयेत् । अनिगृहीते सिद्धव्यञ्जनं हि रात्रौ तीक्ष्णाः प्रवासयेयुः । ततस्तद्व्यञ्जनाः प्रक्रोशेयुः—असौ ब्रह्महा ब्राह्मणीजारश्च’ इति ।
(१) कार्तान्तिकव्यञ्जनो वा कन्यामन्येन वृतामन्यस्य प्ररूपयेत्—‘अमुष्य कन्या राजपत्नी राजप्रसविनी च भविष्यति, सर्वस्वेन प्रसह्य वैनां लभस्व’ इति । अलभ्यमानायां परपक्षमुद्धर्षयेत् । लब्धायां सिद्धः कलहः ।
(२) भिक्षुकी वा प्रियभार्यं मुख्यं ब्रूयात्—‘असौ ते मुख्यो यौवनोत्सिक्तो भार्यायां मां प्राहिणोत्; तस्याहं भयाल्लेख्यमाभरणं गृहीत्वाऽऽगतास्मि,


उसकी रूपवती स्त्री राजा के योग्य है। आप उसको ले लें।' यदि वह संघमुख्य उस स्त्री को ग्रहण कर ले तो पन्द्रह दिन के बाद सिद्ध-वेषधारी दूष्य पुरुष संघमुख्यों के पास आकर शोर मचाता हुआ इस प्रकार कहे 'यह संघमुख्य मेरी पत्नी या पुत्रवधू या बहिन या लड़की को बलात् उपभोग करता है।' इस बात को सुनकर संघ के लोग यदि उस संघमुख्य को गिरफ्तार कर लें तो विजिगीषु राजा उस गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी ओर मिलाकर, विरोधी संघों के साथ उसको युद्ध करने के लिए खड़ा कर दे। यदि उसको गिरफ्तार न किया जाय तो सिद्ध के वेष में आये हुए उस दूष्य पुरुष को तीक्ष्ण गुप्तचर रात में मार डालें। उसके बाद वही तीक्ष्ण गुप्तचर सिद्ध का वेष धारण कर यह शोर मचाये कि 'अमुक संघमुख्य ब्रह्म-हत्यारा है। यह ब्राह्मणी का बलात् उपभोग करता है और इसी ने ब्राह्मण को भी मार डाला है।'

(१) ज्योतिषी के वेष में रहने वाले सभी गुप्तचर किसी दूसरे संघमुख्य द्वारा वरण की हुई कन्या को किसी दूसरे ही संघमुख्य के लिए बतलाकर उससे कहे कि 'अमुक व्यक्ति की कन्या से जो व्याह करेगा वह राजा होगा और उससे जो पुत्र होगा वह भी राजा बनेगा। इसलिए अपना सर्वस्व लगाकर अथवा बलात्कार द्वारा ही उसको अवश्य प्राप्त करो।' इसके बाद यत्न करने पर भी यदि वह संघमुख्य उस कन्या को प्राप्त न कर सके तो जिस घर में उस कन्या का विवाह हुआ है उन लोगों को इसके विरुद्ध उभारे। यदि वह कन्या को प्राप्त कर ले तब दोनों संघमुख्यों में झगड़ा होना निश्चित है।

(२) अथवा भिक्षुकी के वेष में रहने वाली गुप्तचर पर किसी ऐसे संघमुख्य के पास, जो कि अपनी स्त्री पर बुरी तरह आसक्त है, जाकर यह कहे 'अपने यौवन के अभिमान में अमुक संघमुख्य ने आपकी स्त्री के साथ समागम करने की इच्छा से दूती बनाकर मुझे भेजा है, भय से विवश होकर वह प्रेमपत्र और यह आभूषण