कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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केषु विक्रमस्व, अपगच्छ वा, ततः पणशेषमवाप्स्यसि' इति । ततः सत्रिणः परेषु ग्राहयेयुरेतदरिप्रदत्तमिति ।
(१) शत्रुप्रख्यातं वा पण्यमविज्ञातं विजिगीषुं गच्छेत् । तदस्य वैदेहक-व्यञ्जनाः शत्रुमुख्येषु विक्रीणीरन् । ततः सत्रिणः परेषु ग्राहयेयुः—‘एतत्पण्य-मरिप्रदत्तम्’ इति ।
(२) महापराधार्थमानाभ्यामुपगृह्य वा शस्त्ररसाग्निभिरमित्रे प्रणि-दध्यात् । अथैकमामात्यं निष्पातयेत् । तस्य पुत्रदारमुपगृह्य रात्रौ हतमिति ख्यापयेत् । अथामात्यः शत्रोस्तानेकैकशः प्ररूपयेत् । ते चेद्यथोक्तं कुर्युर्न चैनान्ग्राहयेत् । अशक्तिमतो वा ग्राहयेत् । आप्तभावोपगतो मुख्यादस्या-
लिखकर भेजना चाहिए । उस पत्र का आशय हो 'यह थोड़ा-बहुत सामान जो मैंने आपके लिए भेजा है और साथ ही बाजार में बिकने योग्य बड़ा सामान भी भेज रहा हूँ । मेरे शत्रु की सहायता करने वाले राजाओं पर तुम आक्रमण करो अथवा उन्हें छोड़कर मेरी सहायता के लिए तैयार बने रहो । शर्तनामे का बाकी धन तुम्हें 'चढ़ाई कर देने के बाद मिलेगा ।' उसके बाद सत्री गुप्तचर अन्य सामवायिक राजाओं को यह विश्वास दिला दें कि यह पत्र उनके शत्रु द्वारा ही भेजा गया है ।
(१) अथवा सामवायिक राजाओं से किसी एक के साथ संबंध जोड़कर, रत्न आदि बाजारू सामान बिना किसी के जाने हुए किसी तरह विजिगीषु के पास पहुँचा दिया जाय । उसके बाद व्यापारियों के वेष में रहने वाले गुप्तचर सामवायिक राजाओं में से किसी एक के हाथ उसको बेच दें; उसके बाद सत्री गुप्तचर दूसरे सामवायिक राजाओं के यहाँ जाकर पुलिस द्वारा उस सामान को बरामद करा दे और तब यह सिद्ध करे कि 'यह सामान आपके शत्रु द्वारा यहाँ अमुक-अमुक व्यक्तियों के पास बेचने के लिए भेजा गया है ।' इसका परिणाम यह होगा कि सामवायिक राजाओं को यह विश्वास हो जायेगा कि हम में से कोई राजा विजिगीषु के साथ मिला हुआ है । इस प्रकार उनमें परस्पर फूट पड़ जायेगी ।
(२) विजिगीषु को चाहिए कि अपने महापराधी अमात्य आदि को भूमि, हिरण्य आदि धन तथा मान-संमान देकर अपने वश में करे और फिर उन्हें शत्रु पर शस्त्र, रस आदि के द्वारा आक्रमण करने के लिए नियुक्त कर दे । पहिले इस प्रकार के महापराधी एक ही अमात्य को शत्रु के यहाँ भेजे । उसके चले जाने के बाद उसके स्त्री-पुत्रों को किसी एकांत स्थान में छिपा कर यह अफवाह फैला दे कि राजा ने उनको रात में मरवा डाला है । जब उस अमात्य पर शत्रु का पूरा विश्वास जम जाय तो वह, विजिगीषु के यहाँ से आये हुए अन्य अमात्यों का एक-एक करके राजा से यह परिचय करा दे कि ये लोग विजिगीषु के द्वेष के कारण निकल भागे हैं और