कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्र० ८६ : अ० ११ ] शुद्धदण्ड और चित्रदण्ड [ ३९१
(१) यदृच्छाघाते पुंसः, पशुयूथस्तेये च शुद्धवधः । दशावरं च यूथं विद्यात् ।
(२) उदकधारणं सेतुं भिन्दतस्तत्रैवाप्सु निमज्जनम् । अनुदकमुत्तमः साहसदण्डः । भग्नोत्सृष्टकं मध्यमः ।
(३) विषदायकं पुरुषं स्त्रियं च पुरुषघ्नीमपः प्रवेशयेद्गर्भिणीम् । गर्भिणीं मासावरप्रजाताम् ।
(४) पतिगुरुप्रजाघातिकामग्निविषदां सन्धिच्छेदिकां वा गोभिः पादयेत् ।
(५) विवीतक्षेत्रखलवेश्मद्रव्यहस्तिवनादीपिकमग्निना दाहयेत् ।
(६) राजाक्रोशकमन्त्रभेदकयोरनिष्टप्रवृत्तिकस्य ब्राह्मणमहानसावलेहिनश्च जिह्वामुत्पाटयेत् ।
(७) प्रहरणावरणास्तेनमनायुधीयमिषुभिर्घातयेत् । आयुधीयस्योत्तमः ।
( १ ) जो व्यक्ति किसी दूसरे को अचानक ही मार डाले या पशुओं के झुंड की तथा घोड़ों की चोरी करे उसको शुद्ध प्राणदण्ड दिया जाय । कम-से-कम दस पशुओं का एक झुंड समझना चाहिए ।
( २ ) जो व्यक्ति पानी के बाँध को तोड़े, उसको वहीं जल में डुबा कर मार दिया जाय । यदि जल-बाँध में पानी न हो तो तोड़ने वाले को उत्तम साहस दण्ड दिया जाय । यदि वह पहिले ही से टूटा-फूटा हो और तब उसे तोड़ा जाय तो मध्यम साहस दण्ड दिया जाय ।
( ३ ) विष देकर किसी की हत्या करने वाले स्त्री-पुरुष को जल में डुबाकर खत्म कर दिया जाय, बशर्ते कि वह स्त्री गर्भिणी न हो। यदि गर्भिणी हो तो बच्चा पैदा होने के एक मास बाद उसका ऐसा ही प्राणांत किया जाय ।
( ४ ) अपने पति, गुरु और बच्चे की हत्या करने वाली, आग लगाने वाली, विष देने वाली, सेंध लगाकर चोरी करने वाली, स्त्री को गायों के पैरों के नीचे कुचलवा कर मारा जाय ।
( ५ ) जो व्यक्ति चारागाह, खेत, खलिहान, घर और लकड़ियों तथा हथियारों से सुरक्षित जंगल में आग लगा दे उसको आग में ही जला दिया जाय ।
( ६ ) जो व्यक्ति राजा को गाली दे, गुप्त रहस्य को खोल दे, राजा के अनिष्ट को फैलाये और ब्राह्मण की भोजनशाला से जबर्दस्ती अन्न लेकर खाने लगे उसकी जिह्वा कटवा दी जाय ।
( ७ ) जो आयुधजीवी न होकर भी हथियार और कवच आदि चुराये, उसे सामने खड़ा करके बाणों से मरवा दिया जाय । यदि वह आयुधजीवी हो तो उसको उत्तम साहस दण्ड दिया जाय ।