कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्र० ७७ : अ० २ ] व्यापारियों सम्बन्धी नियम ३५३
(१) तुलामानाभ्यामतिरिक्ताभ्यां क्रीत्वा हीनाभ्यां विक्रीणानस्य त एव द्विगुणा दण्डाः ।
(२) गण्यपण्येष्वष्टभागं पण्यमूल्येष्वपहरतः षण्णवतिर्दण्डः ।
(३) काष्ठलोहमणिमयं रज्जुचर्ममृन्मयं सूत्रवल्करोममयं वा जात्यमित्यजात्यं विक्रयाधानं नयतो मूल्याष्टगुणो दण्डः ।
(४) सारभाण्डमित्यसारभाण्डं, तज्जातमित्यतज्जातं, राधायुक्तमुपधियुक्तं समुद्गपरिवर्तिमं वा विक्रयाधानं नयतो हीनमूल्यं चतुष्पञ्चाशत्पणो दण्डः, पणमूल्यं द्विगुणः, द्विपणमूल्यं द्विशतः । तेनार्घवृद्धौ दण्डवृद्धिर्व्याख्याता ।
(५) कारुशिल्पिनां कर्मगुणापकर्षमाजीवं विक्रयक्रयोपघातं वा सम्भूय समुत्थापयतां सहस्रं दण्डः ।
(६) वैदेहकानां वा सम्भूय पण्यमवरुन्धतामनर्घेण विक्रीणतां क्रीणतां वा सहस्रं दण्डः ।
( १ ) जो बनिया अधिक वजन के तराजू-बाट से माल खरीद कर हल्के तौल से उसे बेचे उसको दुगुना २४ पण दण्ड दिया जाय ।
( २ ) गिनकर बेची जाने वाली चीजों में बनिया यदि आठवाँ हिस्सा चुरा ले तो उस पर छियानवे पण जुरमाना किया जाय ।
( ३ ) जो बनिया लकड़ी, लोहा, मणि, रस्सी, चमड़ा, मिट्टी, सूत, छाल और ऊन से बने हुए घटिया माल को बढ़िया कह कर रखता या बेचता हो उस पर वस्तु की कीमत का आठ गुना जुरमाना किया जाय ।
( ४ ) बनावटी कस्तूर, कपूर आदि वस्तुओं को असली कह कर; दूसरे देश में पैदा हुई कमसल वस्तु को असली देश की बताकर; चमकदार बनावटी मोती को को; मिलावटी वस्तु को; अच्छे माल की पेटी को दिखाकर रद्दी माल की पेटी को देने पर; व्यापारी को चौवन पण दण्ड दिया जाय । यदि वह माल एक पण मूल्य का हो तो पहिले से दुगुना दण्ड और दो पण कीमत का हो तो दो-सौ पण दण्ड दिया जाय । इसी प्रकार अधिक मूल्य के माल पर अधिक दण्ड किया जाय ।
( ५ ) जो लुहार, बढ़ई आदि कारीगर आर्डर के अनुसार कार्य न करें, एक पण की जगह दो पण मजदूरी लें, किसी वस्तु को बेचते समय अधिक दाम और खरीदते समय कम दाम कहकर खरीद फरोख्त में विघ्न डालें, उनमें से प्रत्येक को एक-एक हजार पण दण्ड दिया जाय ।
( ६ ) जो व्यापारी आपस में मिलकर किसी वस्तु को बेचने से रोक दें और फिर उसी वस्तु को अनुचित मूल्य पर बेचें या खरीदें उनमें प्रत्येक को एक एक हजार पण जुरमाना किया जाय ।
२३ कौ०