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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 434 of 918

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Page 434

३५० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) शतसहस्रादूर्ध्वं राजगामी निधिः । ऊने षष्ठमंशं दद्यात् ।
(२) पूर्वपौरुषिकं निधिं जानपदः शुचिः स्वकरणेन समग्रं लभेत । स्वकरणाभावे पंचशतो दण्डः । प्रच्छन्नादाने सहस्रम् ।
(३) भिषजः प्राणाबाधिकमनाख्यायोपक्रममाणस्य विपत्तौ पूर्वः साहसदण्डः । कर्मापराधेन विपत्तौ मध्यमः । मर्मवेधवैगुण्यकरणे दण्डपारुष्यं विद्यात् ।
(४) कुशीलवा वर्षारात्रिमेकस्था वसेयुः । कामदानमतिमात्रमेकस्यातिवादं च वर्जयेयुः । तस्यातिक्रमे द्वादशपणो दण्डः । कामं देशजातिगोत्रचरणमैथुनापहाने नर्मयेयुः ।


( १ ) गड़ा हुआ खजाना यदि एक लाख पण से अधिक निकले तब उसका स्वामी राजा होता है । अन्यथा वह पता देने वाले व्यक्ति को ही दिया जाय; किन्तु उनमें से छठा हिस्सा वह राजा को अवश्य दे ।

( २ ) साक्षी और लेख आदि के प्रमाण से यदि यह साबित हो जाय कि खजाना पाने वाले व्यक्ति के पूर्वजों का है; यदि वह व्यक्ति सदाचारी है तो उस खजाने का स्वामी वही समझा जाय । यदि वह साक्षी और लेख आदि के बिना ही उस खजाने पर अधिकार जमाने लगे तो उसपर पाँच-सौ पण दण्ड किया जाय । यदि कोई छिपकर चुपचाप ही अपना कब्जा कर ले तो उस पर एक हजार पण दण्ड किया जाय ।

( ३ ) वैद्य : राजा को बिना सूचित किये यदि कोई वैद्य किसी ऐसे रोगी का इलाज करे, जिसके मरने की संभावना है, और दवा देने के दौरान में ही उसकी मृत्यु हो जाय तो उस वैद्य को प्रथम साहस दण्ड दिया जाय । यदि इलाज में भूल हो जाने के कारण मृत्यु हुई हो तो माध्यम साहस दण्ड दिया जाय । शरीर के किसी विशेष अङ्ग का गलत ऑपरेशन होने के कारण यदि रोगी का वह अंग जाता रहे, या दूसरी तरह की हानि हो जाय तो वैद्य को दण्ड-पारुष्य प्रकरण के अनुसार यथोचित दण्ड दिया जाय ।

( ४ ) नट-नर्त्तक : वर्षा ऋतु में नट नर्त्तक आदि एक ही स्थान पर निवास करें । उनकी कला से प्रसन्न होकर यदि कोई व्यक्ति उन्हें उचित मात्रा से अधिक पुरस्कार दे तो वे उसे स्वीकार न करें, अपनी अधिक तारीफ को भी वे पसन्द न करें । इस नियम का उल्लंघन करने पर बारह पण दण्ड दिया जाय । किसी खास देश, जाति, गोत्र या चरण के मजाक या निन्दा को छोड़कर तथा मैथुन संबन्धी कर्तव्यों को छोड़कर नट लोग जो चाहें अपने इच्छानुसार खेल दिखाकर दर्शकों को खुश कर सकते हैं ।